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पूर्व विधायक होशियार सिंह पर दर्ज विजिलेंस मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा : सुधीर शर्मा

धर्मशाला, 21 जुलाई । देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ विजिलेंस द्वारा दर्ज किए गए मामले को लेकर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को जारी प्रेस बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक द्वेष और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है तथा सरकार विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि विधायक ऐच्छिक निधि का उद्देश्य जनहित के कार्यों और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना होता है। प्रदेश के सभी विधायक वर्षों से इसी प्रक्रिया के तहत राशि जारी करते रहे हैं। ऐसे में होशियार सिंह के खिलाफ दर्ज किया गया मामला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि विजिलेंस ने बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के प्राथमिकी दर्ज कर दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कार्रवाई पूर्वाग्रह से प्रेरित है।

सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा चुनावों के दौरान देहरा, हमीरपुर और धर्मशाला क्षेत्र के महिला मंडलों को वितरित की गई राशि को लेकर पैदा हुए विवाद और जनाक्रोश से बौखलाई हुई है। इसी बौखलाहट में सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार ने प्रदेश में ऐसा माहौल बना दिया है, जहां सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ झूठे और बेबुनियाद मामले दर्ज किए जा रहे हैं। चाहे वह विपक्षी नेता हों, पत्रकार हों या समाजसेवी, सभी को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक स्थिति है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि होशियार सिंह पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। भाजपा विधायक ने दावा किया कि होशियार सिंह द्वारा देहरा की विधायक एवं मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है, जिस पर जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी मामले से ध्यान भटकाने और राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए सरकार इस प्रकार की कार्रवाई कर रही है।

सुधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा इस मामले को जनता के बीच लेकर जाएगी और सरकार की कथित प्रतिशोधात्मक राजनीति को बेनकाब करेगी। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।

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