पानी छोड़ने के पहले ही दिन टूटी सोनपुरवा माइनर नहर, हजारों एकड़ धान की खेती पर संकट
पलामू, 11 जुलाई । पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड में उत्तर कोयल मुख्य नहर से जुड़ी सोनपुरवा माइनर में शनिवार को पानी छोड़े जाने के पहले ही दिन नहर टूट जाने से सैकड़ों किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में नहर क्षतिग्रस्त होने से सोनपुरवा, बहेरा, रीगाड़ीह और बलि बिगहा गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई और नहर की तत्काल मरम्मत की मांग की है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, नहर की मरम्मत और निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि ठेकेदार ने लगभग दो किलोमीटर तक कार्य पूरा करने का दावा किया, जबकि ह्यूम पाइप केवल करीब एक किलोमीटर तक ही बिछाया गया। शेष हिस्से में केवल मिट्टी भरकर कार्य पूरा दिखा दिया गया, जिसके कारण पानी का दबाव पड़ते ही नहर टूट गई।
चौकड़ी पंचायत के उपमुखिया एवं प्रभावित किसान सतीश कुमार सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का पूरी तरह अभाव था। मिट्टी का भराव भी तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं किया गया। परिणामस्वरूप पानी छोड़े जाने के पहले ही दिन नहर टूट गई। अब किसानों को अपनी जेब से ह्यूम पाइप लगाकर वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसान संग्राम सिंह, नरेंद्र सिंह, विकास सिंह, कुणाल कुमार, वीरेंद्र सिंह, उदय सिंह और कामाख्या सिंह सहित बहेरा गांव के कई किसानों ने बताया कि धनरोपनी का कार्य शुरू हो चुका है। नहर में समय पर पानी नहीं मिलने के कारण पहले ही महंगे डीजल और मोटर पंप के सहारे धान का बिचड़ा तैयार करना पड़ा। अब सिंचाई की सबसे अधिक आवश्यकता के समय नहर टूट जाने से पूरी फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
किसानों ने सिंचाई विभाग से मांग की है कि क्षतिग्रस्त सोनपुरवा माइनर की तत्काल मरम्मत कर सिंचाई व्यवस्था बहाल की जाए। साथ ही निर्माण कार्य में कथित लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार की जांच कर उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।