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Uttarakhand

कवियों ने तीखे व्यंग्यात्मक और सम सामयिकी विषयों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं की जमकर ताली बटोरी

पौड़ी गढ़वाल, 18 जून । जय कंडोलिया पौड़ी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने तीखे व्यंग्यात्मक और सम सामयिकी विषयों पर कविताओं से श्रोताओं की जमकर ताली बटोरी। स्थानीय प्रेक्षागृह में आयोजित देर शाम तक चले काव्य पाठ में कवि वीरेंद्र खंकरियाल ने क्षणिकाओं के माध्यम से व्यंग्यात्मक शैली में चारो ओर व्याप्त भ्रष्टाचार पर करारी चोट की। उनकी कविता “जमी से आसमान हो गया, मेरा उत्तराखंड जवान हो गया।

गढ़वाली गीतकार मनोज रावत अंजुल ने “धार लगनी गौँ का गौँ छन, सुन पोड्याँ इख मोका मोका छन” से गांवों के पलायन का दर्द उकेरा। गढ़वाली गीत के माध्यम से प्रमेंद्र नेगी ने “एगो ह्यूंद, एगो ह्यूद इबरी क्याजि रोलू ज्यूदु, पोर परार दया केगी यमराज, एस्यु का साल कुंजणी क्या होंद।” वृद्धावस्था के दर्द को बयाँ किया। नवोदित युवा कवि मनोज साहनी ने रणचंडी तीलू रौतेली को समर्पित कविता को कुछ इस तरह प्रस्तुत किया कि “हाय तिलू तू भूल गयी, क्या प्रतिशोध की लाशें झूल गयी,कौथिग जो तुझे सुहाता है क्या स्वाभिमान लाज नहीं खाता है” वरिष्ठ कवि गणेश खुगशाल गणी ने ज्यूंदा रयांमा जौंका बान जिन्दगिभर खपणू रौं

मोरणा बाद बि वूंकै बान नि जै सकणू छौं इनै – उनै वु मेरि फोटू अग्वाड़ि द्यू बाळी बैठ्यां छन, उन त उखमा खिकचट मच्यूं- के माध्यम से मौत के बाद का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया।

कवि और संयोजक विजय कपरवान ने “मजहबों का ये जहाँ अच्छा नहीं ल6गता, बिन माँ के मुझे मकान अच्छा नहीं लगता, मां की ममता और सारगर्भिता को दर्शाया। राष्ट्रीय कवि नीरज नैथानी ने अपने व्यंग्यात्मक शैली से समसामयिक घटनाओं पर चोट की। इनके अलावा डा कुसुम भट्ट, धर्मेंद्र उनियाल, नवीन दर्द और गढ़वाली ब्यंग में माहिर हरीश जुयाल “कुटज” ने भी शानदार कविता प्रस्तुत की।

आयोजक और पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी ने सभी कवियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कवि सम्मेलन के आयोजन में व्यवस्थापक गौरव सागर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर नरेश चंद्र नौडियाल, नाट्यकर्मी यमुना राम, सुबोध रावत, इंद्रमोहन चमोली, अनुज किमोठी आदि शामिल रहे।

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