मिनरल ब्लॉकों के डेलिनियेशन से ऑक्शन तक बनेगा एक्शन प्लान
जयपुर, 18 जून । राजस्थान में वैध खनन को बढ़ावा देने, अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने और माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से खान एवं भूविज्ञान विभाग मिनरल ब्लॉकों के डेलिनियेशन से लेकर नीलामी तक की प्रक्रिया को तेज करेगा। इसके लिए विभाग की ओर से एक समग्र एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने गुरुवार को खनिज भवन में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की हाइब्रिड बैठक को संबोधित करते हुए फील्ड अधिकारियों को मिनरल ब्लॉकों को जल्द तैयार कर समयबद्ध तरीके से उनकी नीलामी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लॉकों के तैयार होने से लेकर ऑक्शन तक की संपूर्ण प्रक्रिया के लिए स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की जाए, ताकि क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हो सके। समय पर नीलामी होने से न केवल वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अवैध खनन गतिविधियों पर भी प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की भी संभावना है।
अरोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान को माइनिंग सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभाग वैध खनन को प्रोत्साहित करने के लिए मिनरल ब्लॉकों की नीलामी पर विशेष जोर दे रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग को इस वर्ष राजस्व संग्रहण का बड़ा लक्ष्य मिला है। इसे हासिल करने के लिए अभी से कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसके साथ ही पुराने बकाया राजस्व और अवैध खनन गतिविधियों पर की गई कार्रवाई से संबंधित बकाया राशि की वसूली पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
एसीएस माइंस ने अधिकारियों से फील्ड में सक्रियता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ अवैध खनन गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
बैठक में निर्माण कार्यों में बजरी के विकल्प के रूप में एम-सेंड (मैन्युफैक्चर्ड सैंड) के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने संबंधित संस्थाओं से एम-सेंड के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
बैठक में बजट घोषणाओं की क्रियान्विति, राजस्व संग्रहण और विभागीय प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, उप सचिव राकेश कुमार, निदेशक पेट्रोलियम अवधेश सिंह, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा, अतिरिक्त निदेशक महेश माथुर, एडीजी आलोक प्रकाश जैन, अधीक्षण भू-वैज्ञानिक संजय सक्सैना, ओएसडी तकनीकी श्रीकृष्ण शर्मा, अधीक्षण भू-वैज्ञानिक (एरियल सर्वे) सुनील कुमार वर्मा सहित मुख्यालय और फील्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।