नगरीय निकाय चुनाव: टिकट की दौड़ में भाजपा-कांग्रेस के हजारों दावेदार
जयपुर, 26 अगस्त । नगरीय निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के 309 निकायों के 10,245 वार्डों में होने वाले चुनाव के लिए दोनों प्रमुख दलों के सामने बड़ी संख्या में आए आवेदनों में से जिताऊ प्रत्याशी चुनने की चुनौती है। जयपुर में भाजपा को 150 वार्डों के लिए 2500 से अधिक आवेदन मिले हैं, जबकि कांग्रेस के प्रदेशभर में 38 हजार से अधिक ऑनलाइन आवेदन आ चुके हैं। दोनों दलों में 27 अगस्त से नामांकन शुरू होने के साथ प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच गई है।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए भाजपा में 2500 से अधिक दावेदार सामने आए हैं। इनमें करीब 50 फीसदी आवेदन महिलाओं और युवाओं के बताए जा रहे हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी ने वार्डवार छंटनी शुरू कर दी है। प्रत्येक वार्ड से तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया जा रहा है, जिसमें संगठन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
जयपुर संभाग के निकाय प्रभारी एवं नगर निगम चुनाव पर्यवेक्षक प्रभुलाल सैनी के अनुसार टिकट वितरण में किसी नेता के दबाव या प्रभाव को आधार नहीं बनाया जाएगा। प्रत्याशी चयन में दावेदार के स्वभाव, जनता में स्वीकार्यता, संगठन में सक्रियता और जीतने की क्षमता को महत्व दिया जाएगा।
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में 27 से 29 अगस्त तक संभागवार बैठकें प्रस्तावित हैं। 29 अगस्त को जयपुर के नामों पर अंतिम स्तर पर मंथन होगा। बैठक में संभाग प्रभारी, सह प्रभारी, पर्यवेक्षक, निगम प्रभारी, निकाय संचालन समिति के सदस्य, जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी, सांसद, विधायक और विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी शामिल होंगे।
भाजपा में पार्षद टिकट के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के मैदान में उतरने से मेयर पद की संभावित दौड़ भी चर्चा में आ गई है। पूर्व मेयर, पूर्व उपमहापौर, पूर्व जिलाध्यक्ष और संगठन पदाधिकारियों की सक्रियता को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
वैश्य समाज से पूर्व मेयर निर्मल नाहटा, पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील कोठारी, पूर्व उपमहापौर पुनीत कर्णावट, पूर्व शहर जिलाध्यक्ष संजय जैन, आईटी संयोजक अजय विजयवर्गीय, जिला महामंत्री राजेश तांबी और जयपुर चुनाव प्रभारी विमल अग्रवाल जैसे नाम चर्चा में हैं। वहीं ब्राह्मण समाज से पूर्व शहर जिलाध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव, मनोज भार्गव, पूर्व उपमहापौर मनीष पारीक, पूर्व मेयर-उपमहापौर रहे मनोज भारद्वाज और पूर्व पार्षद जितेंद्र श्रीमाली की सक्रियता भी चर्चा में है।
मेयर की संभावित दौड़ में ऐसे नेता भी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने पार्षद टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है। इनमें पूर्व मेयर एवं पूर्व विधायक अशोक लाहोटी तथा जयपुर शहर भाजपा जिलाध्यक्ष अमित गोयल के नाम राजनीतिक चर्चाओं में हैं।
कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सीताराम अग्रवाल द्वारा अपने भतीजे महेश के लिए भाजपा से टिकट मांगे जाने से भी पार्टी के भीतर नई चर्चा शुरू हुई है। अग्रवाल विद्याधर नगर से उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के सामने विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे।
दूसरी ओर कांग्रेस में भी टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार है। प्रदेश के 309 निकायों के 10,245 वार्डों के लिए पार्टी को अब तक 38 हजार से अधिक ऑनलाइन आवेदन मिले हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार 30 अगस्त तक यह आंकड़ा 40 हजार के पार पहुंच सकता है। अकेले जयपुर के 150 वार्डों में 2000 से अधिक आवेदन मिले हैं। कई वार्डों में पांच या उससे अधिक दावेदार हैं और युवाओं तथा जेन-जी की भागीदारी भी बड़ी संख्या में है।
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस ने निकाय और पंचायत चुनाव में युवाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने का वादा किया है। इसी कारण युवाओं में टिकट को लेकर उत्साह है। पार्टी ऐसे दावेदारों को प्राथमिकता देगी, जो क्षेत्र में सक्रिय हैं, जनता के बीच पकड़ रखते हैं और संगठन के साथ लगातार काम कर रहे हैं।
कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन से पहले प्रदेश के सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में रायशुमारी शुरू कर दी है। पर्यवेक्षक और जिला प्रभारी दावेदारों से वन-टू-वन संवाद कर स्थानीय राजनीतिक समीकरण, जनसंपर्क और जीत की संभावनाओं की जानकारी ले रहे हैं। पर्यवेक्षक और जिला प्रभारी 27 अगस्त को अपनी रिपोर्ट डोटासरा को सौंपेंगे।
इसके बाद प्रत्येक वार्ड से तीन-तीन नामों का पैनल तैयार होगा। जिला कांग्रेस कमेटी और राजनीतिक मामलों की समिति जमीनी फीडबैक के आधार पर अंतिम नामों पर मंथन करेगी।
टिकट की दौड़ में कांग्रेस नेताओं के आवास से लेकर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय तक हलचल बढ़ गई है। बड़ी संख्या में दावेदार डोटासरा से मुलाकात कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर भी विभिन्न क्षेत्रों से टिकट के इच्छुक नेता पहुंच रहे हैं। सांसदों, विधायकों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं से भी दावेदार टिकट की पैरवी कर रहे हैं।
डोटासरा के अनुसार कांग्रेस ने निकाय चुनाव की तैयारी करीब छह महीने पहले ही शुरू कर दी थी। विधानसभा स्तर पर करीब ढाई साल पहले समन्वयक नियुक्त किए गए थे। राजनीतिक मामलों की समिति के साथ प्रदेश पदाधिकारियों और जिला प्रभारियों के जरिए लगातार फीडबैक लिया जा रहा है।
नामांकन का समय नजदीक आने के साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने हजारों दावेदारों में से वार्डवार मजबूत चेहरे चुनने की चुनौती है। भाजपा में महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी से नए समीकरण बने हैं, तो कांग्रेस में युवाओं और जेन-जी के बढ़ते आवेदन ने पार्टी को उत्साहित किया है। अब दोनों दलों की रणनीति इस बात पर टिकी है कि संगठन की सक्रियता, सामाजिक समीकरण, जनस्वीकार्यता और जीत की क्षमता के बीच किसे टिकट दिया जाए। 27 अगस्त से नामांकन शुरू होने के बाद टिकट को लेकर चल रही सियासी खींचतान और तेज होने के आसार हैं।
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन के लिए 27 से 31 अगस्त तक का कार्यक्रम तय किया है। लेकिन 28 अगस्त को रक्षाबंधन और 30 अगस्त को रविवार होने के कारण प्रत्याशियों को प्रभावी रूप से केवल तीन दिन—27, 29 और 31 अगस्त—ही पर्चे दाखिल करने के लिए मिलेंगे। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर चल रही कवायद भी निर्णायक दौर में पहुंच गई है।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में नामांकन के लिए 15 रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) कार्यालय बनाए गए हैं। प्रत्येक आरओ कार्यालय के अधीन 10 वार्ड रखे गए हैं। संबंधित वार्डों से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी निर्धारित आरओ कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। निर्वाचन शाखा ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।
इधर चुनाव कराने के लिए मतदान कार्मिकों का प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। जयपुर जिले की सभी नगरीय निकायों में चुनाव के लिए 13,076 पीठासीन अधिकारी (पीआरओ) और मतदान अधिकारियों (पीओ) को दो सत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में मतदान प्रक्रिया, ईवीएम संचालन, मतदान केन्द्र पर कार्मिकों की जिम्मेदारियां और विभिन्न चुनावी प्रपत्रों के संधारण की जानकारी दी जा रही है। ईवीएम की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक और लाइव प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
वहीं लोकसभा चुनावों में बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को दी गई होम वोटिंग की सुविधा इस बार नगरीय निकाय चुनाव में उपलब्ध नहीं होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव में घर से मतदान का प्रावधान नहीं किया है। ऐसे में बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं सहित सभी पात्र मतदाताओं को मतदान के लिए अपने निर्धारित मतदान केन्द्र पर ही जाना होगा।
नामांकन की प्रक्रिया पांच दिन के दायरे में रखी गई है, लेकिन दो अवकाश के कारण प्रत्याशियों को केवल तीन कार्यदिवस मिलेंगे। 27 अगस्त को नामांकन शुरू होगा, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के कारण अवकाश रहेगा, 29 अगस्त को नामांकन होगा, 30 अगस्त रविवार के कारण प्रक्रिया बंद रहेगी और 31 अगस्त को नामांकन का अंतिम दिन होगा। सीमित समय के चलते राजनीतिक दलों और दावेदारों के बीच टिकट तथा नामांकन को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।