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पश्चिमी सिंहभूम में भारी वाहनों पर दिन में रोक की मांग तेज, 26 अप्रैल से चाईबासा-रांची न्याययात्रा की घोषणा

चाईबासा, 14 अप्रैल । पश्चिमी सिंहभूम जिले में भारी वाहनों की दिन में आवाजाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। चाईबासा बाइपास सड़क (डोबरोसाई–गितिलपी मार्ग) और एनएच-75 (ई) पर लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं से आक्रोशित लोगों ने अब आंदोलन को व्यापक रूप देने का निर्णय लिया है।

ग्रामीणों ने घोषणा की है कि 26 अप्रैल से चाईबासा से रांची तक “न्याययात्रा” निकाली जाएगी, जो 1 मई को रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपेगी।

मंगलवार को सिंहपोखरिया गांव में नो एंट्री आंदोलन समिति द्वारा जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों से समर्थन मांगा गया। समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने कहा कि भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन के कारण हर महीने सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी रोजाना गुजरते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है।

टाटा कॉलेज के पास सामाजिक संगठनों के साथ हुई बैठक में न्याययात्रा के आयोजन पर विस्तार से चर्चा की गई। आंदोलन को मजबूत करने के लिए आसपास के गांवों-जैसे तांबों, तुईवीर, गितिलपी, महुलसाई और टुंगरी क्षेत्र के लोगों को भी जोड़ा जा रहा है।

समिति ने बाइपास सड़क, एनएच-75(ई) और एनएच-220 पर दिन में नो एंट्री लागू करने, दुर्घटना पीड़ितों को उचित मुआवजा देने और तांबो चौक आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की भी मांग रखी है।

उल्लेखनीय है कि 27 अक्टूबर 2025 को तांबो चौक पर हुए सड़क जाम के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प के बाद कई लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, जो फिलहाल न्यायालय में लंबित है।———–

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