प्रधानमंत्री माेदी को बार-बार उत्तराखंड खींच लाती है आस्था और विश्वास की डोर
देहरादून, 14 अप्रैल । उत्तराखंड केे विकास का आज एक नया अध्याय शुरू हुआ है। देहरादून-दिल्ली आर्थिक गलियारा प्रदेश के विकास को एक नई गति देगा। प्रधानमंत्री की देवभूमि के प्रति श्रद्धा और आस्था उनके संबोधन में साफ नजर आई। उनका संबोधन न सिर्फ विकास की एक नई राह दिखाता है बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं, योग, अध्यात्म, पर्यटन व तीर्थाटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की गारंटी भी देता है।
मंगलवार काे शहीद जसवंत सिंह मैदान पर सजे मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र ने बेहद शांत भाव से उत्तराखंड के विकास की अवसंरचनाओं को लोगों के समक्ष रखा। उन्हाेंने गढ़वाली और कुमांऊनी भाषा में बड़े बुजुर्गों और छोटों का अभिवादन किया। साथ ही यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ समेत देवभूमि के तमाम देवताओं को प्रणाम करते हुए देश की उन्नति व प्रगति का आशीर्वाद मांगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि अभी करीब दो लाख करोड़ की योजनाओं पर कार्य चल रहा है और वे भी जल्द ही उत्तराखंड के विकास की संभावनाओं को और नई ऊंचाइयां देंगे। उन्हाेंने केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब तक रोप-वे के साथ ऑलवेदर रोड का भी का भी अपने संबोधन में जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने राज्य में मां गंगोत्री के मायके मुखवा गांव सहित अन्य स्थलाें के लिए शीतकालीन पर्यटन पर जाेर देने का असर दिखा। अब शीतकालीन यात्रा में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा पर 80 हजार श्रद्धालु आए, जो 2025 में बढ़कर चार लाख से अधिक हो गए।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2023 में पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश की यात्रा की। उसके बाद से भगवान शिव के परम धाम आदि कैलाश के यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ी। वर्ष 2025 में करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शनों का पुण्य अर्जित किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबाेधन
में उत्तराखंड की प्रसिद्ध नंदा राज जात यात्रा का भी उल्लेख किया। मां नंदा को प्रणाम करते हुए उन्होंने देश की महिलाओं को नंदा राजजात का संदेश दिया। उन्हाेंने हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले को दिव्य व भव्य बनाने का संकल्प दाेहराया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देवभूमि के विकास के लिए अपना समर्पण स्पष्ट कर गए।