तुर्किये की विमानन कंपनी के क्लियरेंस पर हाईकोर्ट में अहम् सुनवाई, सेलेबी की याचिका चर्चा में!
दिल्ली हाईकोर्ट में तुर्की की कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज के मामले में गुरुवार को दूसरी बार सुनवाई होगी। यह सुनवाई उस याचिका के संबंध में है, जिसमें सेलेबी ने अपने सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। भारत के ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने 15 मई को सेलेबी का सुरक्षा क्लियरेंस समाप्त कर दिया था। इस मामले में सेलेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने अदालत में यह कहा कि सेलेबी पिछले 17 वर्षों से भारत में कार्यरत है और इसके पास 10,000 कर्मचारी हैं जो विभिन्न भारतीय एयरपोर्ट पर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
मुकुल रोहतगी ने अपनी दलील में 2022 में कंपनी को नियम-15 के तहत 5 साल के लिए लाइसेंस दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कंपनी को बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के सुरक्षा मंजूरी से वंचित करने का निर्णय नियमों के विपरीत है। उन्होंने अदालत से अपील की कि इस मामले में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। इस बीच, सरकार की ओर से भी सिलसिलेवार चार दलीलें पेश की गई हैं।
सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज भारत में कई प्रमुख एयरपोर्ट जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, और गोवा में ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करती है। हालांकि, कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द होने के बाद अब ये सेवाएं जारी करना मुश्किल हो गया है। सेलेबी का कहना है कि उनका सुरक्षा क्लियरेंस रद्द करने का कारण स्पष्ट नहीं है और इससे लगभग 3,791 नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज ने यह भी दावा किया है कि यह कंपनी भारतीय प्राइवेट ग्राउंड हैंडलिंग क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों में से एक है। इसने 220 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है और वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 400 से अधिक एयरलाइन ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी का कहना है कि वह तुर्की सरकार का संगठन नहीं है और उनका किसी भी विदेशी सरकार के साथ कोई राजनीतिक संबंध नहीं है। कंपनी ने एक वैश्विक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि उनके निर्णय में उच्च पारदर्शिता बनी हुई है।
इस बीच, भारत में तुर्की की अन्य कंपनियों के परियोजनाओं पर भी नजर रखी जा रही है। यूपी, दिल्ली, गुजरात, मुंबई और जम्मू-कश्मीर में तुर्की की कंपनियों के कई प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन कंपनियों की भूमिका और यहाँ के विभिन्न सेक्टरों में निवेश की स्थिति की समीक्षा करना शुरू कर दिया है।
कुल मिलाकर, तुर्की की कंपनियों के खिलाफ भारत में गहरी गंभीरताएं देखी जा रही हैं, खासकर उनके पाकिस्तान के साथ सहकारिता के संदर्भ में। इसके कारण ही न केवल व्यापारिक संबंधों में मंदी आ रही है, बल्कि तुर्की से आयात किए जाने वाले सामानों का भी बहिष्कार किया जा रहा है।