यूपी में 50 से अधिक CMO को नोटिस: HRMS पर संस्तुति गायब, मिशन निदेशक की बड़ी कार्रवाई!
उत्तर प्रदेश में बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई की गई, जिसमें 50 से अधिक मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। NHM निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के द्वारा जारी यह नोटिस उन मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ है जिन्होंने संविदा पर नियुक्त कर्मियों के पुनर्नियुक्ति से संबंधित आवेदनों पर अपनी संस्तुति को राज्य स्तर पर आगे नहीं बढ़ाया। इस संदर्भ में, नोटिस जारी करते समय 2 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।
जिन जिलों के CMO को यह नोटिस भेजा गया है, उनमें आगरा, अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़ और अन्य शामिल हैं। इन सभी को बताया गया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों की पारस्परिक पुनर्नियुक्ति नीति के तहत निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। नोटिस में कहा गया है कि अधिकारियों को इच्छुक कर्मचारियों के द्वारा मानव सम्पदा पोर्टल पर दिए गए आवेदनों पर प्राथमिकता देते हुए 15 दिनों के भीतर अपनी संस्तुति राज्य शासन को भेजनी थी, लेकिन कई CMO इस दिशा-निर्देश का पालन करने में विफल रहे।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि मानव सम्पदा पोर्टल पर जिन संविदा कर्मियों के आवेदन भेजे गए थे, उन्हें समय पर संस्तुति नहीं दी गई, जो न केवल राज्य सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है बल्कि यह कार्य में उदासीनता का भी परिचायक है। डॉ. जोवल ने सभी CMO को निर्देश दिया है कि वे 2 दिनों के भीतर इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करें और सभी प्राप्त आवेदनों पर अपनी संस्तुति पोर्टल पर दर्ज करें।
इस नोटिस की अहमियत इस बात में है कि यह स्पष्ट करता है कि सरकार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिरता और गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रही है। संविदा कर्मियों के लिए पारस्परिक पुनर्नियुक्ति नीति को लागू करना उनके अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा में निरंतरता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। ऐसे में, यदि अधिकारियों द्वारा इस दिशा में कोई लापरवाही बरती जाती है, तो यह न केवल संबंधित जिला प्रशासन की कार्य क्षमता पर प्रश्न चिह्न लगाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को भी प्रभावित कर सकता है।
इस संदर्भ में अगले कुछ दिनों का समय CMO के लिए महत्त्वपूर्ण होगा, क्योंकि उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि निर्देशों का पालन हो और संविदा कर्मियों के पुनर्नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया समय पर सही तरीके से संपन्न हो सके।