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तलाकशुदा पत्नी भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की हकदार

तलाकशुदा पत्नी भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की हकदार

जोधपुर, 07 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के मामले में तलाकशुदा पत्नी को भी राहत का अधिकार है।

याचिकाकर्ता पति राजूराम द्वारा गत चार मार्च 2021 को सत्र न्यायाधीश चूरू द्वारा पारित आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी जिसमें अपीलीय अदालत ने अपील को खारिज करते हुए 27 सितंबर 2019 को न्यायिक मजिस्ट्रेट सरदार शहर द्वारा पारित आदेश को बनाए रखा। उक्त आदेश में न्यायालय ने घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12, 18, 19, 20, 22 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता पति को प्रतिवादी पत्नी संतोष को मासिक रूप से तीन हजार रुपये का भत्ता देने का आदेश दिया था।

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार गर्ग ने 2022 (3) यूसी 1505 में सुप्रीम कोर्ट के प्रभा त्यागी बनाम कमलेश देवी मामले में दिए गए निर्णय के संदर्भ में घरेलू हिंसा की परिभाषा के व्यापक दायरे को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि तलाकशुदा पत्नी भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत पाने की हकदार है। न्यायालय का मानना है कि जब एक बार घरेलू हिंसा की घटना घटित हो जाती है, तो तलाक का आदेश भी दोषी को उसके द्वारा की गई अपराध से मुक्त नहीं कर सकता और न ही पीडि़ता को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मिलने वाली राहत से वंचित कर सकता है।

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