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डॉक्टर की मुस्कान और संवेदनशील व्यवहार भी इलाज का हिस्सा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल, 03 सितंबर । मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को चिकित्सकीय ज्ञान और तकनीकी दक्षता देना नहीं, बल्कि उनमें सेवा, संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। मरीज और उसके परिजन कठिन परिस्थितियों में डॉक्टर से उम्मीद और भरोसे के साथ मिलते हैं। ऐसे में चिकित्सक का व्यवहार, संवाद और संवेदनशीलता उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

उप मुख्यमंत्री ने गुरुवार काे मंत्रालय में ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि युवा चिकित्सकों को समाज, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने सेवांकुर भारत के साथ एमओयू किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं को इस पहल को प्रभावी और सतत रूप से लागू करने के निर्देश दिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर समाज को समझेंगे मेडिकल विद्यार्थी

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान के माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के लोगों के बीच जाकर उनके जीवन, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों में मरीजों के प्रति सहानुभूति के साथ वास्तविक संवेदनशीलता और सेवा की भावना विकसित होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत को करीब से देखने और वहां की समस्याओं को समझने का अनुभव युवा चिकित्सकों को भविष्य में अधिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ चिकित्सा सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ रही हैं, संस्कार भी जरूरी

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, चिकित्सा शिक्षा की सीटों में वृद्धि और चिकित्सकों की भर्ती पर लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवा चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। ऐसे में यह भी जरूरी है कि नई पीढ़ी के चिकित्सक ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ सेवा-भाव और मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध हों। उन्होंने कहा कि आज के मेडिकल विद्यार्थी ही कल स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उनका समाज से जुड़ाव बढ़ाना और उन्हें सेवा के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को दीर्घकाल में और मजबूत करेगा।

हर मेडिकल कॉलेज में प्रतिनिधि नामित करने के निर्देश

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अधिष्ठाताओं को निर्देश दिए कि सेवांकुर भारत के साथ हुए एमओयू को महज औपचारिकता न बनाकर प्रभावी गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया जाए। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक प्रतिनिधि नामित किया जाए और विद्यार्थियों के लिए सेवांकुर भारत का परिचयात्मक सत्र आयोजित किया जाए। इसमें संस्था के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी देकर इच्छुक विद्यार्थियों को ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान से स्वैच्छिक रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाए।

उन्होंने चयनित विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन और कार्यक्रम के समन्वय में मेडिकल कॉलेजों से आवश्यक सहयोग देने तथा सेवांकुर भारत के साथ निरंतर एवं सार्थक समन्वय बनाए रखने को कहा।

सेवा संस्कार से तैयार होगी नई चिकित्सक पीढ़ी

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सेवांकुर भारत के साथ एमओयू किया गया है। इसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को समाज और सेवा से अधिक मजबूती से जोड़ना तथा चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी चिकित्सक पीढ़ी तैयार करना चाहती है, जिसकी पहचान केवल विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि सेवा भावना, संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी हो। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और ग्रामीण एवं वंचित समाज की परिस्थितियों की समझ युवा चिकित्सकों के व्यक्तित्व का स्वाभाविक हिस्सा बने, यही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी।

बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह, आयुक्त धनराजू एस., वनवासी कल्याण आश्रम के गिरीश कुबेर, जनजातीय मंत्रणा परिषद, राजभवन के डॉ. रूपनारायण मांडवे, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डॉ. अश्विनी कुमार तुपकरी, महादेव पड़वल, गौरव शर्मा सहित प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।

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