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भारतीय ज्ञान परंपरा में आदिवासी समुदाय का अविस्मरणीय योगदान: प्रो. मीना

जोधपुर, 08 अगस्त । विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर आदिवासी अध्ययन केन्द्र जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. यादराम मीणा, विशिष्ट अतिथि सुशील बच्छावत, एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. औतार लाल मीना द्वारा की गई। आदिवासी अध्ययन केन्द्र के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह मीना ने अतिथियों का स्वागत उद्बोधन दिया एवं कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. यादराम मीना ने इस वर्ष विश्व आदिवासी दिवस की थीम स्वदेशी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की रक्षा करना पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया, जो कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आदिवासियों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार परंपरागत रूप से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों द्वारा आदिवासी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति का प्रयोग करते हैं तथा सामान्य बीमारियों का किस प्रकार घरेलू नुस्खों का उपयोग करते हैं। उन्होंने आदिवासियों के इस परंपरागत चिकित्सकीय पद्धति एवं प्राकृतिक जीवन पर गहन शोध एवं संरक्षण की आवश्यकता बताई, जिसमें आदिवासी अध्ययन केन्द्र मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. औतार लाल मीना ने अपने उद्बोधन में प्राचीन साहित्य में, मुख्य रूप से जैन साहित्य में आदिवासियों के विस्तृत विवरणों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध शिक्षक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. भरत कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रवीण चन्द ने किया गया। डॉ. रश्मि मीना ने धन्यवाद दिया। इस उपलक्ष्य में आदिवासी अध्ययन केन्द्र द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आदिवासी विषय पर निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित करवाई गई, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्रों ने उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को आदिवासी अध्ययन केन्द्र द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे एवं प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

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