मड़कम देवा ने झींगा और मछली पालन को बनाया मुख्य व्यवसाय, कृषि मंत्री किया सम्मानित
सुकमा, 01 जुलाई । जिले में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सहायक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में नीली क्रांति ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया और सशक्त आधार बनकर उभरी है। सुकमा जिले के दुब्बाटोटा निवासी मड़कम देवा हैं, जिन्होंने शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर झींगा और मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपये का लोन स्वीकृत किया गया, जिसमें 4.20 लाख रूपये का भारी अनुदान शामिल था। इसके साथ ही, 24 घंटे पानी की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्रेड़ा विभाग द्वारा उन्हें सब्सिडी पर सोलर पंप की अनमोल सुविधा भी दी गई। झींगा पालन के क्षेत्र में सुकमा का नाम रोशन करने के लिए रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के हाथों मड़कम देवा को सम्मानित किया जा चुका है।
मड़कम देवा ने न सिर्फ वित्तीय सहायता का लाभ लिया, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से समय-समय पर आधुनिक मत्स्य पालन का तकनीकी प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इसी वैज्ञानिक पद्धति और कड़ी मेहनत का नतीजा है कि इस वर्ष अकेले जून माह में ही उन्होंने लगभग 2.50 क्विंटल झींगा और 15 क्विंटल मछली की बिक्री की। इस उत्पादन से उन्हें करीब 5 लाख रूपये की शानदार आय अर्जित हुई है। दूर दूर से लोग दुब्बा टोटा मछली और झींगा खरीदने के लिए आते हैं। बाजार में मछली और झींगे की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को निरंतर आय होती है। विभाग का कहना है कि जो भी इच्छुक ग्रामीण या युवा इन योजनाओं के लिए वे अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहां मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएं हैं। मड़कम देवा जैसे प्रगतिशील किसान आज हमारे ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शासन की मंशानुसार अंतिम छोर के व्यक्ति तक इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। हम सुकमा के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे उन्नत सहायक व्यवसायों से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, ताकि जिला आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छू सके।