आईआईटी जोधपुर बना सीईआरएन की प्रतिष्ठित सीएमएस कोलैबोरेशन का फुल मेंबर
जोधपुर, 01 जुलाई । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर ने वैश्विक विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित विश्व की सबसे बड़ी पार्टिकल फिजिक्स प्रयोगशाला सीईआरएन की प्रतिष्ठित सीएमएस कोलैबोरेशन का फुल मेंबर दर्जा प्राप्त कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ आईआईटी जोधपुर अब दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के उस विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पदार्थ की मूल संरचना और प्रकृति के मौलिक नियमों से जुड़े वैज्ञानिक रहस्यों की खोज में सहयोग कर रहे हैं।
सीईआरएन में स्थापित एलएचसी दुनिया का सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सीलरेटर है। वर्ष 2012 में इसी के सीएमएस प्रयोग के माध्यम से वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसॉन की ऐतिहासिक खोज की थी, जिसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में गिना जाता है। फुल मेंबर बनने के बाद आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक सीएमएस कोलैबोरेशन के दीर्घकालिक शोध कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
संस्थान के शोधकर्ता पार्टिकल फिजिक्स के अत्याधुनिक अनुसंधान, नई पीढ़ी की डिटेक्टर तकनीकों के विकास तथा लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर से प्राप्त विशाल डेटा के विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेंगे।
आईआईटी जोधपुर में इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. लता पंवार एवं डॉ. जितेंद्र कुमार करेंगे। दोनों वैज्ञानिक पहले भी सीईआरएन की विश्वप्रसिद्ध एटलस, एलाइस और सीएमएस परियोजनाओं से जुड़े रह चुके हैं तथा प्रायोगिक पार्टिकल फिजिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं। उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए वर्ष 2025 में उन्हें सम्मानित किया गया था।
आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विश्व के अग्रणी वैज्ञानिकों के साथ कार्य करने तथा भविष्य की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजों में योगदान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को भी सशक्त बनाएगी।