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गैंगस्टर अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई 16 मार्च को

जबलपुर, 14 फ़रवरी । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वानी की डिवीजन बेंच के समक्ष कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई हुई। जिस पर राज्य सरकार की तरफ से कड़ी आपत्ति जताई गई। कहा गया कि जब हिरासत का आधार ही याचिका में स्पष्ट नहीं है, तो उसे चुनौती कैसे दी जा सकती है।

इसके पूर्व में रज्जाक ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री और मौजूदा विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक के इशारे पर व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते एनएसए के तहत कार्रवाई की गई। इसके बाद बेंच ने उन्हें नोटिस जारी किया था। हालांकि विधायक ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका इस कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है।

सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि रज्जाक की पत्नी सुबीना बेगम ने पहले हिरासत के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसे 8 जुलाई 2025 को वापस ले लिया गया था। अब जबकि हिरासत का ठोस आधार याचिका में उल्लेखित नहीं है, यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि रज्जाक को यदि राहत चाहिए तो उसे जमानत अर्जी दाखिल करनी चाहिए, न कि इस प्रकार की याचिका।

सरकार की आपत्ति पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अली और अधिवक्ता शारिक अकील फारुकी ने जवाब देने के लिए समय मांगा। डिवीजन बेंच ने 16 मार्च को अगली सुनवाई तय करते हुए मामले को स्थगित कर दिया।

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