सौ प्रतिशत इथेनॉल वाहनों की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा, आपूर्ति कैसे होगी?
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अगर सौ प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाले वाहनों की अनुमति दी गई है तो इनकी आपूर्ति कैसे की जाएगी? जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। गुरुवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी।
दरअसल 26 अक्टूबर को, सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम में बदलाव की अधिसूचना जारी की, जिसमें ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों को अनुमति दी गई है। ये वाहन ई100 तक पर चल सकते हैं। ई100 ईंधन की मदद से वाहन लगभग पूरी तरह से इथेनॉल पर चल सकते हैं। 27 अक्टूबर को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार की फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा को मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन के संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज इस मुद्दे पर हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया। न्यायालय ने कहा कि परसों हमने कुछ समाचार पत्रों में ऐसी खबरें देखी हैं, जिनमें कहा गया है कि 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाले वाहनों की अनुमति है। हम अकेडमिक रूप से जानना चाहते हैं कि अगर 100 प्रतिशत इथेनॉल वाले वाहनों की इजाजत दी जाती है तो आप आपूर्ति कैसे करेंगे। न्यायालय ने किसानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया।
इस पर अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत होगी। उन्होंने न्यायालय को आश्वासन दिया कि वे अगली बहस में किसानों से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से बात करेंगे।
यह विवाद मूल रूप से कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद शुरू हुआ, जिसमें तेल विपणन कंपनियों को एक इथेनॉल निर्माता को आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। इसके खिलाफ एक तेल कंपनी ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया और दलील दी कि ऐसे आदेशों से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति (ई20) अस्थिर हो सकती है। उसके बाद 30 जून को उच्चतम न्यायालय ने 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन बढ़ाने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
