बुजुर्गों के भरण-पोषण और सम्मान के लिए बेटे-बहू तो संपत्ति से बेदखल कर सकता है ट्रिब्यूनल: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 19 अगस्त । उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसले में साफ कहा है कि अगर किसी बुजुर्ग के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान के लिए जरुरी हो तो संबंधित ट्रिब्यूनल उनकी संपत्ति से बेटे-बहू को बेदखल करने का आदेश दे सकता है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना कानून का अहम उद्देश्य है। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें बेटे और बहू को संपत्ति से बाहर करने के ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया गया था।
मामला लखनऊ के विकास नगर स्थित एक मकान से जुड़ा हुआ है। मकान के मालिक रविकांत गुप्ता ने अपने बेटे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। गुप्ता का आरोप था कि उनके बेटे ने 81 वर्षीय उनकी मां यानी अपनी दादी को घर में नहीं रहने दिया और कथित तौर पर उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद बुजुर्ग महिला को वृद्धाश्रम जाना पड़ा।
गुप्ता ने जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने माता-पिता के भरण-पोषण के लिए और अपने बेटे को मकान से बेदखल करने की मांग की। मजिस्ट्रेट ने नवंबर 2022 में कहा कि ये मकान रविकांत गुप्ता की स्व-अर्जित संपत्ति है। आदेश में कहा गया था कि उनके बेटे ने अपनी दादी को घर में रहने की अनुमति नहीं दी थी। मजिस्ट्रेट ने बेटे को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दिया था।
मजिस्ट्रेट के आदेश को रविकांत गुप्ता के बेटे और बहू ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत अधिकारियों को संपत्ति से बेदखली का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी।