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Haryana

हिसार : 36 साल बाद शहीद भरत सिंह को मिला सम्मान, खांडा खेड़ी में बनेगा स्मारक

देश के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात रहे और पूरी निष्ठा से कर्तव्य निभाया।

वर्ष 1990 में उनकी पोस्टिंग लेह-लद्दाख में हुई। पांच अप्रैल 1990 को ऑपरेशन मेघदूत

के दौरान पाकिस्तान की ओर से हुए हमले का बहादुरी से सामना करते हुए उन्होंने मातृभूमि

की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी वीरता ने दुश्मन के मंसूबों को नाकाम

कर दिया, लेकिन देश ने अपना एक जांबाज सपूत खो दिया।

उस समय उनके पीछे पत्नी मीना, तीन वर्षीय बेटी रेनू और डेढ़ वर्षीय बेटा संदीप

रह गए थे। पति की शहादत के बाद मीना ने अकेले ही दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। कठिन

परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार दिए। आज बेटी रेनू

विदेश में रह रही है, जबकि बेटा संदीप उपमंडल कार्यालय में सरकारी सेवा में कार्यरत

है।

शहीद के पुत्र संदीप ने शनिवार काे बताया कि पिछले 12 वर्षों से परिवार बलिदान स्मारक

बनवाने की मांग को लेकर लगातार प्रयास कर रहा था। करीब चार वर्ष पहले गांव के सरकारी

विद्यालय का नाम शहीद भरत सिंह के नाम पर रखा गया था, लेकिन परिवार की सबसे बड़ी इच्छा

स्मारक निर्माण की थी। अब एसडीएम विकास यादव के प्रयासों और जिला परिषद की ग्रांट से

यह सपना साकार होने जा रहा है।

गांव पंचायत ने स्मारक के लिए 600 गज भूमि उपलब्ध कराई है। यहां शहीद भरत सिंह

की प्रतिमा, आकर्षक लाइटिंग, चारदीवारी और सुंदर पार्क का निर्माण होगा, ताकि आने वाली

पीढ़ियां इस वीर सपूत के बलिदान से प्रेरणा ले सकें।

शहीद की पत्नी मीना ने भावुक होकर कहा कि पिछले 36 वर्षों में उन्होंने अनगिनत

सरकारी कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाए। कई बार उम्मीद जगी, लेकिन हर

बार निराशा हाथ लगी। अब जब स्मारक निर्माण शुरू हुआ है तो ऐसा लग रहा है कि उनके पति

की शहादत को सच्चा सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के एक संवेदनशील अधिकारी

की पहल ने वर्षों पुराने घावों पर मरहम लगाने का काम किया है। खांडा खेड़ी का यह बलिदान

स्मारक केवल ईंट-पत्थरों का निर्माण नहीं होगा, बल्कि यह उस वीर सैनिक की अमर गाथा

का प्रतीक बनेगा, जिसने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

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