तोरपा में बाल संरक्षण समितियों के सशक्तीकरण पर कार्यशाला
खूंटी, 02 जून । खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड परिसर में मंगलवार को ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति (वीएलसीपीसी) के पुनरुत्थान और सशक्तीकरण के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संभव ट्रस्ट की ओर से किया गया, जिसमें प्रखंड की सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और समितियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में उप-प्रमुख एवं प्रखंड स्तरीय बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष संतोष कर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके समग्र विकास के लिए ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों का सक्रिय होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं से अपने-अपने क्षेत्रों में बाल अधिकारों और संरक्षण संबंधी गतिविधियों को गंभीरता से संचालित करने का आह्वान किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभव ट्रस्ट की अध्यक्ष मोनिका आर्या ने बाल संरक्षण समितियों के प्रभावी संचालन, अभिलेख एवं पंजी संधारण तथा किशोर-किशोरियों के नामांकन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चाइल्ड इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन (सीएनसीपी) श्रेणी के बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना समितियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मोनिका आर्या ने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अधिकारों, उनके संरक्षण और कल्याण से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने नशामुक्ति अभियान, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, किशोर-किशोरियों के नामांकन को बढ़ावा देने तथा ग्राम स्तर पर माहवारी स्वच्छता अभियान संचालित करने के महत्व को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में बच्चों के अनुकूल गांव विकसित करने की अवधारणा पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यदि ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियां सक्रिय और जागरूक रहें तो बाल विवाह, बाल श्रम, नशे की लत, स्कूल छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके लिए समुदाय की भागीदारी और नियमित निगरानी आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने तथा ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय और प्रभावी बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यशाला में आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाएं नूतन डांग और बेला रचना मिंज सहित प्रिया कुमारी, महेश्वरी देवी तथा बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सेविकाएं और अन्य प्रतिभागी मौजूद थे। ————–