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जयपुर डेयरी का बड़ा विस्तार: बिचून में 540 करोड़ का नया प्लांट, 1000 युवाओं को मिलेगा रोजगार

जयपुर, 25 अप्रैल । राजस्थान में डेयरी सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) द्वारा रीको के बिचून औद्योगिक क्षेत्र में अत्याधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए रीको ने करीब 15 हेक्टेयर भूमि आवंटन का ऑफर लेटर जारी कर दिया है।

प्रस्तावित प्लांट में दूध प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के लिए पॉलीफिल्म निर्माण और बटर स्टोरेज जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस प्लांट के शुरू होने से जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में डेयरी उत्पादों की सप्लाई और वितरण प्रणाली और अधिक मजबूत होगी।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट’ के तहत किए गए एमओयू का परिणाम है। करीब 540 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट वर्ष 2029 तक उत्पादन शुरू करेगा। इसके माध्यम से लगभग 1000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

जयपुर के निकट स्थित बिचून औद्योगिक क्षेत्र तेजी से निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यहां करीब 131 हेक्टेयर क्षेत्र में 44 औद्योगिक भूखंड विकसित किए गए हैं। रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना के तहत लगातार भूखंडों का आवंटन किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

हाल ही में आयोजित योजना के नौवें चरण में 4 भूखंड आवंटन के लिए रखे गए, जिनमें से 2 पर प्रक्रिया जारी है। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 33 हेक्टेयर है। इससे पहले चौथे चरण में 13 में से 7 भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है।

बिचून क्षेत्र में अन्य निवेशकों की भी रुचि बढ़ रही है। ‘राइजिंग राजस्थान’ के तहत लोहिया एलॉयस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टेनलेस स्टील उत्पादों का इंटीग्रेटेड प्लांट और रॉक्सुल रॉकवूल टेक्निकल इंसुलेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हॉट इंसुलेशन यूनिट स्थापित करने की योजना है। इन परियोजनाओं से करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश और सैकड़ों रोजगार सृजन की संभावना है।

राज्य सरकार ‘राइजिंग राजस्थान’ के तहत हुए निवेश समझौतों को तय समय में धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसी कड़ी में रीको ने प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है, ताकि निवेशकों को सहज और तेज प्रक्रिया में औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए जा सकें।

यह परियोजना न केवल डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।

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