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बाबा साहब अंबेडकर जयंती पर आनासागर में हुआ घोषवादन

अजमेर, 14 अप्रैल । अजमेर की पहचान बनी आनासागर झील पर डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा ‘नौका नाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धा, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के तहत सायं 5 बजे पुरानी चौपाटी पर एकत्रित हुए करीब 50 स्वयंसेवक वाद्य यंत्रों के साथ बैटरी संचालित क्रूज पर सवार होकर झील में उतरे और घोषवादन के माध्यम से 35 देशभक्ति धुनों की प्रस्तुति दी। इन धुनों में शंख, बांसुरी, आनक, प्रणय, नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (क्लैरिनेट), गोमुख (यूफोनियम), तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग किया गया। क्रूज पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करता रहा, जहां शहरवासियों ने किनारों पर खड़े होकर कार्यक्रम का आनंद लिया।

इस अवसर पर संघ के चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि आनासागर केवल एक झील नहीं, बल्कि हिंदू विजय का जल स्मारक है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका निर्माण चौहान शासक महाराजा अर्णोराज द्वारा कराया गया था, जो अजमेर के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।

महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रारंभ से ही सामाजिक समरसता के भाव को लेकर कार्य कर रहा है और समाज में भाईचारे तथा समानता को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि संघ की घोष परंपरा वर्ष 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति भी है।

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