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सरना धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए्र सरना धर्म कोड लागू हो: बंधन तिग्गा

सरना धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए्र सरना धर्म कोड लागू हो: बंधन तिग्गा

खूंटी, 11 मई (हि.स.)। मुरहू प्रखंड के डौगड़ा में 15वें स्थापना दिवस पर दो दिवसीय सरना धर्म प्रार्थना सभा रविवार को संपन्न हो गई। इस अवसर पर धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु बगरय मुंडा और धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिंङबोंगा का पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की गई।

समारोह में मुख्य अथिति धर्मगुरु बंधन तिग्गा और विशिष्ट अथिति ओडिशा के धर्मगुरु परमेश्वर सिंह मुंडारी शामिल हुए। इस अवसर पर धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि सरना प्रकृति पर आधारित मानव सभ्यता का प्रचीनतम धर्म है। यह सभी धर्मों का आधार और संरक्षक है।

सरना धर्म की अपने धार्मिक विधि-विधान, बहुमूल्य जीवन शैली, दर्शन तथा आदर्श है जिसमें लाखों लोगों की धार्मिक आस्था है, परंतु राजनीतिक महत्वकांक्षा के कारण सरकारें सरना धर्म कोड और आदिवासी अधिकारों के प्रति उदासीन है। सरना धर्म कोड के अभाव में केवल सरना धार्मिक एवं सामाजिक एकता टूटी है बल्कि हम धर्मांतरण जैसी पीड़ा वर्षों से झेलने को मजबूर हैं।

अतः हम सरकार से मांग करते हैं कि सरना समाज और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरना धर्म कोड यथाशीघ्र लागू करें। विशिष्ट अतिथि परमेश्वर सिंह मुंडारी ने कहा कि सिंगबोंगा की स्तुति से मानव जीवन में भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है।

हमें जीवन को खुशहाली लाने के लिए हमेशा धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। इस अवसर पर बुधराम सिंह मुंडा, कमले उरांव, सुभासिनी पूर्ति, गोपाल बोदरा सहित अन्य ने विचार व्यक्त् किये। समारोह में खूंटी, रांची, मुरहू, बंदगांव, चक्रधरपुर, ओड़िशा, अड़की, कोचांग, बिरबांकी तथा आस-पास के गांवों के सरना धर्मावलंबी शामिल हुए।

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