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Uttarakhand

दुष्कर्म के आरोपित भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष पांडे की जमानत अर्जी निरस्त

नैनीताल, 06 अक्टूबर । अपर जिला न्यायाधीश-एफटीएससी (पोक्सो एक्ट) सुधीर तोमर के न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपित भवाली के व्यापारी नेता नरेश पांडे की जमानत अर्जी एक बार पुनः निरस्त कर दी है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता, आरोपित के आपराधिक इतिहास व गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को जमानत न देने का आधार माना है।

अभियोजन के अनुसार, मल्लीताल थाने में दर्ज प्राथमिकी में आरोप है कि नरेश पांडे ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म किया। अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले में पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य उपलब्ध हैं और आरोपित एक अन्य नाबालिग पीड़िता से संबंधित दुष्कर्म के मामले में भी न्यायिक अभिरक्षा में है।

दूसरी ओर बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि आरोपित भवाली व्यापार मंडल का अध्यक्ष है और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़ा है। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि विवेचना पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। आरोपित की ओर से उसके विरुद्ध दर्ज अन्य मामलों में भी राहत मिलने का दावा किया गया।

न्यायालय ने अभियोजन के अभिलेखों के अवलोकन में पाया कि विवेचना के दौरान पीड़िता ने अपने भारतीय न्याय प्रक्रिया संहिता की धारा 180 और 183 के बयानों में घटना का समर्थन नहीं किया है, लेकिन मामले का विचारण अभी शुरू नहीं हुआ है और पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान दर्ज होना शेष है। न्यायालय ने कहा कि विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य अभियोजन दस्तावेजों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

न्यायालय ने आरोपित का आपराधिक इतिहास होने व अन्य दुष्कर्म मामले में न्यायिक अभिरक्षा में होने का भी उल्लेख किया। न्यायालय ने माना कि इस स्तर पर जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित किए जाने और आरोपित के फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इन परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने नरेश पांडे की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

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