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Haryana

सोनीपत: हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार

कर्मचारियों, इंजीनियरों और प्रबंधन की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया।

डॉ.

शर्मा ने बताया कि मंगलवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज की ओर से आयोजित राष्ट्रीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा

सम्मेलन, उद्योग प्रदर्शनी और नवाचार प्रदर्शनी में हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों

को सम्मानित किया गया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी

में ये पुरस्कार प्रदान किए गए।

उन्होंने

बताया कि पेराई सत्र 2024-25 में शाहाबाद सहकारी चीनी मिल को अन्य रिकवरी क्षेत्र में

तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला। करनाल सहकारी चीनी मिल ने तकनीकी दक्षता और

गन्ना विकास के क्षेत्र में प्रथम स्थान हासिल किया। पानीपत के डाहर स्थित सहकारी चीनी

मिल को तकनीकी दक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला।

डॉ.

शर्मा के अनुसार, पानीपत सहकारी चीनी मिल ने पेराई सत्र 2025-26 में 94.61 प्रतिशत

क्षमता का उपयोग किया। मिल ने 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 5.62 लाख क्विंटल

चीनी का उत्पादन किया। बिजली उत्पादन से करीब 29 करोड़ रुपये की आय हुई। प्रदेश की

11 सरकारी चीनी मिलों में पानीपत मिल की गन्ना पेराई सबसे अधिक रही।

उन्होंने

कहा कि सरकार सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। इन्हें

बहुउत्पादक जैव-ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। चीनी के साथ एथेनॉल,

बिजली, शीरा, बैगास, प्रेसमड और जैव-सीबीजी उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश

में करीब 690 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता की एथेनॉल परियोजनाओं पर लगभग 1200 करोड़ रुपये

के निवेश की दिशा में काम चल रहा है। पानीपत में 90 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता की परियोजना

के लिए करीब 200 करोड़ रुपये निवेश की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।

मंत्री

ने बताया कि हरियाणा शुगरफेड से जुड़ी सहकारी चीनी मिलों ने 285.92 लाख क्विंटल गन्ने

की पेराई कर करीब 26.24 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। सह-उत्पादन के माध्यम से

करीब 12.20 करोड़ इकाई बिजली ग्रिड को दी गई, जिससे लगभग 76.60 करोड़ रुपये का राजस्व

मिला। उन्होंने कहा कि तकनीक, बेहतर प्रबंधन और विविध उत्पादों के जरिए मिलों को मजबूत

करने का लक्ष्य है, ताकि इसका सीधा लाभ गन्ना उत्पादक किसानों को मिल सके।

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