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गैर मान्यता प्राप्त अस्पताल होने के आधार पर नहीं किया जा सकता पुनर्भरण से इनकार

जयपुर, 03 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी के चिकित्सीय व्यय को यह कहकर पुनर्भरण करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसने गैर मान्यता प्राप्त अस्पताल से इलाज कराया है। इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति में यदि सरकारी कर्मचारी ने राज्य से बाहर गैर मान्यता प्राप्त अस्पताल से उपचार लिया है तो नियमों के अनुसार वह चिकित्सा व्ययों के पुनर्भरण का हकदार है। वहीं अदालत ने मामले में राज्य सरकार और राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन को कहा है कि वह याचिकाकर्ता के पिता के इलाज में खर्च हुई राशि का पुनर्भरण नियमों में तय सीमा के तहत छह फीसदी ब्याज सहित करे। जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने यह आदेश अनुपमा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मालपुरा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता अक्टूबर, 2000 को राजस्थान विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर पद से रिटायर हुए थे। कोविड-19 महामारी के दौरान वे बीमार होकर दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती हुए थे और आखिर में नवंबर, 2021 को उसकी मौत हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन में आवेदन कर पिता के इलाज में खर्च हुए 8.90 लाख रुपए के पुनर्भरण की गुहार की। जिसे विवि ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उनका इलाज राज्य के बाहर गैर मान्यता प्राप्त अस्पताल में हुआ था। इसके याचिका दायर कर चुनौती दी गई। जिसके जवाब में राज्य सरकार और विवि की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रही है कि उनके पिता को दिया गया उपचार प्रदेश में उपलब्ध नहीं था या उन्हें एसएमएस अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने दिल्ली के अस्पताल में रेफर किया था। ऐसे में उनका पुनर्भरण आवेदन निरस्त किया गया था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को ब्याज सहित पुनर्भरण राशि अदा करने को कहा है।

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