लोक संस्कृति, साहित्य और रंगकला से जोड़ेगी बाल नाट्य कार्यशाला
मंडी, 15 जुलाई । नई पीढ़ी के भीतर सृजनशीलता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का बीजारोपण करने के उद्देश्य से सतोहल नाटय परिसर में बाल नाटय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला निर्देशक रंगकर्मी सीमा शर्मा ने बताया कि यह कार्यशाला 15 जुलाई से 25 जुलाई तक चलेगी। को प्रातः 11:00 बजे सतुहान नाट्य परिसर, मंडी में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए बाल प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ बाल नाट्य कार्यशाला–2026 का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 25 जुलाई 2026 तक संचालित होगी।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें अपनी लोक संस्कृति, साहित्य और रंगकला की समृद्ध परंपरा से जोड़ना है। इस दौरान प्रतिभागियों को लोकगीत, साहित्य, संगीत, नाट्य विद्या, आशु अभिनय, शारीरिक अभ्यास, संवाद शैली, कल्पनाशक्ति, रचनात्मक अभिव्यक्ति तथा व्यक्तित्व विकास जैसे विविध आयामों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चे अभिनय की बारीकियों के साथ-साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, सामूहिकता और संवेदनशीलता जैसे जीवन-मूल्यों को भी आत्मसात करेंगे।
कार्यशाला की निर्देशिका सीमा शर्मा, जो पिछले तीन दशकों से रंगमंच और सांस्कृतिक आंदोलन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं केवल अभिनय सिखाने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि नई पीढ़ी के भीतर सृजनशीलता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का बीजारोपण करती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में बच्चों का अपनी लोक परंपराओं, भाषा और साहित्य से जुड़ना अत्यंत आवश्यक है, और रंगमंच इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सतुहान नाट्य परिसर से प्रारंभ हुआ यह प्रयास बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें एक जागरूक, आत्मविश्वासी और रचनाशील नागरिक बनने की प्रेरणा देगा। यह कार्यशाला केवल अभिनय का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से संवाद स्थापित करने की एक सार्थक पहल है।