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अदालती आदेश के बावजूद ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र नहीं बनाने पर अवमानना नोटिस

जयपुर, 16 मई । राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भी महिला का ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र नहीं बनाने पर भरतपुर के रूपवास तहसीलदार को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रेशमा देवी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।

अवमानना याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का चयन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुआ था। दस्तावेज सत्यापन के समय उसे कहा गया कि दूसरे राज्य की निवासी होने के कारण वह माइग्रेट होकर आई है। ऐसे में वहां ओबीसी वर्ग में होने के बावजूद उसका ओबीसी प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा सकता। इस पर उसने पूर्व में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि उसने विधवा होने के बाद रूपवास निवासी व्यक्ति से दूसरा विवाह किया है। उसका पति भी ओबीसी वर्ग में आता है। ऐसे में उसे ओबीसी वर्ग में माना जाए। इस पर हाईकोर्ट ने सुनीता रानी में दिए फैसले के आधार पर कहा कि माइग्रेट होने के कारण उसका ईडब्ल्यूएस वर्ग का प्रमाण पत्र बनाया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने गत 17 मार्च को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता का चार सप्ताह में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने के आदेश दिए। इसकी पालना में याचिकाकर्ता ने 24 मार्च को समस्त दस्तावेजों के साथ आवेदन कर दिया, लेकिन उसका ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बनाया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने तहसीलदार को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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