तिरंगा यात्रा के बाद पंचतत्व में विलीन हुए अग्निवीर युवराज, भारत माता के जयघोष से गूंजा गांव
अजमेर, 08 मई । जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए राजस्थान के वीर सपूत अग्निवीर युवराज सिंह चौहान को शुक्रवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। ब्यावर जिले के लगेतखेड़ा गांव में निकली उनकी 22 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा में हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हाथों में तिरंगा लिए लोग अपने वीर जवान को नम आंखों से अंतिम विदाई देने पहुंचे।
तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह जैसे ही गांव पहुंची, पूरा माहौल गमगीन हो गया। गांव की गलियों, बाजारों और रास्तों पर “भारत माता की जय” और “युवराज अमर रहे” के नारे लगातार गूंजते रहे। जगह-जगह ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और सैन्य परंपराओं के अनुसार पूरे सम्मान के साथ वीर सपूत को अंतिम विदाई दी गई। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
परिवारजनों ने बताया कि युवराज सिंह चौहान बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते थे। वे अपने दादा को सेना की वर्दी में देखकर अक्सर कहा करते थे कि वे भी बड़े होकर फौजी बनेंगे। यही सपना उन्हें भारतीय सेना तक लेकर गया। वर्ष 2022 में वे अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए और पूरी निष्ठा के साथ देश सेवा में जुट गए। युवराज केवल एक सैनिक ही नहीं, बल्कि बड़े सपने देखने वाले युवा भी थे। सेना की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की तैयारी भी कर रहे थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई कर वे भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज के लिए काम करना चाहते थे, लेकिन देश रक्षा के दौरान उनकी शहादत ने यह सपना अधूरा छोड़ दिया।
शहादत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। पिता ने नम आंखों से कहा कि बेटे की वीरता पर गर्व है, लेकिन इससे बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता कि जवान बेटा पिता के कंधों पर जाए। वहीं मां बेटे को याद कर बार-बार बेसुध होती रहीं। परिवारजन और रिश्तेदार उन्हें संभालते नजर आए। ग्रामीणों ने बताया कि युवराज बचपन से ही अनुशासित, मेहनती और मिलनसार स्वभाव के थे। गांव के युवाओं के लिए वे प्रेरणा का स्रोत थे। उनकी अंतिम यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया।
इस दौरान ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत और मसूदा विधायक वीरेंद्र सिंह रावत भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दोनों जनप्रतिनिधियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि देश हमेशा युवराज सिंह चौहान की वीरता और बलिदान को याद रखेगा।