अंबिकापुर तालाब घोटाला, दो मौत प्रमाणपत्र से जमीन हड़पने का आरोप, रिंगबांध पर रोक
अंबिकापुर, 26 अप्रैल । अंबिकापुर के रिंगबांध तालाब की जमीन पाटने के मामले में अब गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। समाजसेवी के खुलासे में एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्र बनाकर फर्जी नामांतरण और जमीन हड़पने की साजिश का दावा किया गया है।
बस स्टैंड से लगे रिंगबांध तालाब की 57 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि प्रभावशाली भू-माफियाओं द्वारा जलभराव क्षेत्र को अवैध रूप से पाटा जा रहा था। मामले में विरोध के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से जमीन पाटने पर रोक लगा दी है। नगर निगम ने भी संबंधित भू-स्वामी को नोटिस जारी कर काम बंद करने के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन वर्तमान में आजाद इराकी के नाम पर दर्ज है। इस पूरे प्रकरण में समाजसेवी कैलाश मिश्रा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
दो मौत प्रमाणपत्र, अलग-अलग वारिस
कैलाश मिश्रा के अनुसार, खसरा नंबर 3714 की 57 डिसमिल जमीन पहले कृष्ण बहादुर सिंह के नाम दर्ज थी, जो बाद में जयलाल के नाम पर दर्ज हो गई। इस नामांतरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि, जयलाल के दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए गए।
पहले मामले में नवापारा सखौली निवासी ननकी बाई ने जयलाल की मृत्यु 23 अप्रैल 1976 को होली क्रॉस अस्पताल अंबिकापुर में होना बताया। इस आधार पर नगर निगम ने 24 फरवरी 2018 को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया, लेकिन बाद में आवेदक की मृत्यु के चलते प्रकरण समाप्त हो गया।
इसके बाद चंद्रशेखर यादव द्वारा दायर दूसरे प्रकरण में जयलाल की मृत्यु 12 अप्रैल 1963 को अमलभिट्ठी (लखनपुर) में बताई गई। यह प्रमाणपत्र 62 साल बाद, 1 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत द्वारा जारी किया गया। दोनों मामलों में जयलाल की वंशावली भी अलग-अलग दर्शाई गई है।
फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री का आरोप
कैलाश मिश्रा ने सवाल उठाया कि, एक ही व्यक्ति की मृत्यु दो अलग-अलग तिथियों और स्थानों पर कैसे हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फौती नामांतरण किया गया और इसी आधार पर 8 विक्रेताओं ने उक्त जमीन की रजिस्ट्री आजाद इराकी के नाम कर दी। उन्होंने कलेक्टर से इस नामांतरण को तत्काल निरस्त करने और मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
पार्षद बने पक्षकार, जलक्षेत्र होने का दावा
इस मामले में पार्षद आलोक दुबे ने भी तहसील कार्यालय में चल रहे प्रकरण में पक्षकार बनने का आवेदन दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने दस्तावेजों के साथ शिकायत करते हुए बताया कि, वर्ष 2002 तक पूरा रिंगबांध क्षेत्र 6.25 एकड़ का जलभराव क्षेत्र था, जहां छठ घाट भी बना हुआ है। पटवारी और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में भी इस जमीन को जलक्षेत्र बताया गया है और स्पष्ट किया गया है कि यहां चौहदी निर्धारित नहीं की जा सकती। इसके बावजूद जमीन पाटने की कोशिश की गई।
नगर निगम में उठा मामला, जांच के आदेश
पार्षद आलोक दुबे ने इस मुद्दे को नगर निगम की सामान्य सभा में भी उठाया, जिसके बाद तालाबों को पाटने के मामलों की जांच के लिए प्रस्ताव पारित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी के निर्देश
जलभराव क्षेत्र और तालाबों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि ऐसे क्षेत्रों को न तो पाटा जा सकता है और न ही उनकी उपयोगिता बदली जा सकती है, चाहे वह निजी भूमि ही क्यों न हो। फिलहाल, प्रशासनिक जांच और कानूनी कार्रवाई के बीच यह मामला अंबिकापुर में बड़ा भूमि घोटाला बनता नजर आ रहा है।