सीमांत गांव माणा पहुंचे सीएम, बोले-‘लखपति दीदी’ मॉडल से महिलाएं हुई सशक्त
चमोली, 22 अप्रैल । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा का दौरा कर विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि माणा गांव ‘लखपति दीदी’ मॉडल के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरा है,जहां सभी महिलाएं स्वरोजगार से सशक्त हुई हैं।
मुख्यमंत्री के आगमन पर ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीतों के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने इस आत्मीय स्वागत के लिए आभार जताते हुए स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की सभी ‘लखपति दीदियों’ से मुलाकात कर उनके कार्यों को सराहा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद न केवल आजीविका सशक्त कर रहे हैं, बल्कि राज्य की पहचान को भी मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे रोजगार और पर्यटन के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले “अंतिम गांव” कहे जाने वाले क्षेत्रों को अब “प्रथम गांव” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिशा मिली है।
ग्राम पंचायत माणा में वर्तमान में 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हैं। सभी महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं,जिससे यह गांव राज्य का पहला शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव बन गया है।
यहां महिलाएं ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, होमस्टे, मशरूम उत्पादन सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही हैं। सरस मॉल और स्थानीय स्टॉलों के जरिए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के संतुलित विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।