विज्ञान और समाज के बीच सेतु है पत्रकारिता : डॉ. अनुभा जैन
अजमेर, 17 अप्रैल । विज्ञान पत्रकारिता केवल घटनाओं का विवरण भर नहीं, बल्कि उनके सामाजिक महत्व को समझाने का सशक्त माध्यम है। एक सफल विज्ञान पत्रकार वही होता है, जो जटिल वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में आमजन तक पहुंचाकर उन्हें समाज से जोड़ सके। यह विचार वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अनुभा जैन ने व्यक्त किए।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृति एवं मीडिया अध्ययन विभाग द्वारा “प्रयोगशाला से सुर्खियों तक: व्याख्यात्मक लेख, समाचार और फीचर लेखन की संरचना” विषय पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में डॉ. जैन मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के संरक्षण में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षा और मीडिया के बीच संवाद को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों को पेशेवर पत्रकारिता के लिए तैयार करना था।
डॉ. जैन ने विज्ञान पत्रकारिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र विज्ञान और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि अंतरिक्ष, तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे जटिल विषयों को भी सरल, सटीक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे आमजन में जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने समाचार लेखन की विभिन्न शैलियों पर चर्चा करते हुए बताया कि एक ही तथ्य को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है। समाचार लेखन में तात्कालिकता, तथ्य और आधिकारिकता महत्वपूर्ण होती है, जबकि व्याख्यात्मक लेख में संदर्भ और समझ को प्रमुखता दी जाती है। वहीं फीचर लेखन में गहराई, मानवीय दृष्टिकोण और भावनात्मक जुड़ाव का विशेष महत्व होता है।
डॉ. जैन ने यह भी कहा कि एक अच्छा पत्रकार अपनी गलतियों से सीखता है और हमेशा तथ्यों के सत्यापन, संदर्भ की स्पष्टता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोधपरक दृष्टिकोण अपनाने और विश्वसनीय स्रोतों के उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रांता प्रतीक पटनायक ने बताया कि इस व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था, ताकि वे बदलते मीडिया परिदृश्य में तकनीक और विज्ञान से जुड़े विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अमिताभ श्रीवास्तव, आयोजन समिति के सदस्य डॉ. अनूप कुमार, डॉ. निकोलस लकड़ा एवं डॉ. नीरू प्रसाद सहित अनेक शिक्षाविद् और शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग की छात्राओं विदुषी और कृति कुंदु ने किया।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और विज्ञान पत्रकारिता के क्षेत्र में संभावनाओं, चुनौतियों तथा लेखन तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। यह सत्र उनके लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि भविष्य में विज्ञान संचार के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरणादायक भी सिद्ध हुआ।