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राजस्थान पंचायत चुनाव: कहीं पद्मश्री विजेता हारे, कहीं मां-बेटी बनीं सरपंच; जीत के 12 घंटे बाद वार्ड पंच का इस्तीफा

जयपुर, 31 अक्टूबर । राजस्थान में पंचायत चुनाव के नतीजों ने गांवों की राजनीति में कई चौंकाने वाले रंग दिखाए हैं। कहीं पद्मश्री से सम्मानित प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा, तो कहीं मां-बेटी ने सरपंच बनकर नई मिसाल कायम की। एक नवनिर्वाचित वार्ड पंच ने जीत के महज 12 घंटे बाद ही इस्तीफा दे दिया, वहीं पूर्व मंत्री की पत्नी और सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरों को भी मतदाताओं ने नकार दिया। शुक्रवार देर रात तक चली मतगणना के बाद सामने आए इन परिणामों ने प्रदेशभर में चर्चा छेड़ दी।

राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत में पद्मश्री से सम्मानित श्यामसुंदर पालीवाल को सरपंच चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2021 में पद्मश्री प्राप्त कर चुके पालीवाल को नवीन पालीवाल ने 492 वोट से हराया। नवीन पालीवाल को कुल 1,348 वोट मिले। यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि पिपलांत्री पंचायत में पहले श्यामसुंदर पालीवाल की पत्नी अनीता देवी सरपंच रह चुकी हैं।

जोधपुर जिले की ओसियां पंचायत समिति की खेतासर ग्राम पंचायत में पूर्व मंत्री शंभू सिंह खेतासर की पत्नी बदन कंवर चुनाव हार गईं। उन्हें हीरादेवी प्रजापत ने 173 वोट से पराजित किया। हीरा देवी को 885 वोट मिले, जबकि बदन कंवर को 712 वोट प्राप्त हुए। बदन कंवर पहले प्रधान भी रह चुकी हैं।

बांसवाड़ा जिले में पंचायत चुनाव का एक दिलचस्प परिणाम सामने आया। तलवाड़ा पंचायत समिति की वांका ग्राम पंचायत से संतु देवी सरपंच निर्वाचित हुईं, जबकि गनोड़ा पंचायत समिति की बड़लिया ग्राम पंचायत से उनकी बेटी रेखा कटारा ने जीत दर्ज की।

झालावाड़ जिले की खानपुर पंचायत समिति की मरायता ग्राम पंचायत में वार्ड संख्या दो से निर्वाचित श्रीनाथ नागर ने जीत के महज 12 घंटे बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने विकास अधिकारी सत्येंद्र सिंह सिसोदिया को अपना त्यागपत्र सौंपा।

विकास अधिकारी के अनुसार, नियमानुसार इस्तीफे पर 15 दिन तक विचार किया जाएगा। इस अवधि में निर्णय नहीं होने पर नियमों के अनुसार उसे स्वतः स्वीकार माना जाएगा।

बांसवाड़ा जिले के घाटोल क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की नौकरी छोड़कर सरपंच चुनाव लड़ने वाले अमृत निनामा ने 3,725 वोटों से जीत दर्ज की। दूसरी ओर, पूर्व विधायक हरेंद्र निनामा की पत्नी छठे स्थान पर रहीं, जबकि भारतीय आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष की पत्नी को भी हार का सामना करना पड़ा।

जालोर जिले की तवाव ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव के दौरान एक अलग घटनाक्रम सामने आया। पुलिस ने गुजरात में शराब तस्करी के मामले में लंबे समय से फरार 20 हजार रुपये के इनामी आरोपित कांतिलाल सैन को मतगणना केंद्र से पकड़ा। पुलिस के अनुसार, आरोपित छह अलग-अलग नामों से पहचान बदलकर रह रहा था और अपनी पत्नी ललिता सैन को सरपंच पद का चुनाव लड़वा रहा था। वह मतगणना केंद्र पर पत्नी के एजेंट के रूप में मौजूद था। पुलिस ने उसे गुजरात पुलिस के हवाले कर दिया। ललिता सैन ने सुखी देवी पुरोहित को हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की।

कोटा जिले की कूकड़ा खुर्द ग्राम पंचायत में मतगणना के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर सुरेश मीणा की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद रिजर्व रिटर्निंग ऑफिसर ने मतगणना पूरी करवाई और संदीप सिंह 195 वोट से सरपंच निर्वाचित हुए।

वहीं, अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के राजपुरबड़ा गांव में चुनावी नतीजों को लेकर विवाद के दौरान पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें डीएसपी सहित चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना सामने आई।

कुछ अन्य स्थानों पर भी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने मतगणना पर सवाल उठाते हुए दोबारा गिनती की मांग की।

पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में शनिवार को 3,625 ग्राम पंचायतों में उपसरपंच पद के लिए निर्वाचन प्रक्रिया आयोजित की गई। उपसरपंच चुनाव में आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करते, बल्कि निर्वाचित वार्ड पंच अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। जोधपुर जिले की भावी ग्राम पंचायत में दोबारा मतदान दो नवंबर को निर्धारित होने के कारण वहां उपसरपंच का चुनाव तीन नवंबर को कराया जाएगा।

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