रोहिणी कोर्ट हत्याकांड: दोषी की उम्रकैद की सजा निलंबित करने से हाई कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2017 के रोहिणी कोर्ट मर्डर केस में दोषी ठहराए गए उस व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया, जो अपराध के समय नाबालिग था। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपराध की अत्यधिक गंभीरता और कानून-व्यवस्था के खुले उल्लंघन को देखते हुए जमानत देने से मना कर दिया। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 निर्धारित की गई है।
न्यायालय ने कहा कि दोषी ने दुस्साहस दिखाते हुए न्यायालय परिसर के ठीक बाहर गोलीबारी की थी और पुलिस हिरासत में मौजूद व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी थी। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील रितेश बाहरी ने न्यायालय को बताया कि दोषी लगातार अन्य आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। दिल्ली पुलिस ने रहस्योद्घाट्न किया कि इस मामले में अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर रहने के दौरान भी दोषी के खिलाफ झज्जर (हरियाणा) में एक और नया आपराधिक केस दर्ज किया गया था।
दोषी ने 29 अप्रैल, 2017 को झज्जर जेल में बंद प्रतिद्वंद्वी गैंग के सदस्य राजेश दुर्मथ (काला) को रोहिणी कोर्ट में पेशी से लौटते समय न्यायालय के बाहर काफी नजदीक से गोली मारी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। हरियाणा पुलिस उसे हिरासत में पेशी से वापस लेकर जा रही थी। दिल्ली पुलिस ने उसका संबन्ध नीरज बवाना गैंग से भी बताया था। अपराध के समय वह 17 वर्ष से कुछ अधिक लेकिन नाबालिग था। चूंकि वह घटनास्थल से ही रंगे हाथों पकड़ा गया था इसलिए जघन्य अपराध के मद्देनजर उस पर वयस्कों की तरह मुकदमा चला। निचली अदालत ने उसे जनवरी 2026 में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सुनवाई के दौरान दोषी के वकील परवीन डबास ने उसके सात साल से अधिक समय से जेल में रहने और पुलिस जांच की खामियों पर सवाल उठाये लेकिन उच्च न्यायालय ने सजा पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
