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किशाऊ बांध परियोजना को लेकर एमओयू, सीएम धामी ने केंद्र और सहभागी राज्यों का जताया आभार

देहरादून, 15 सितंबर । किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्र सरकार और सभी सहभागी राज्य सरकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने एमओयू को किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। उत्तराखंड के लिए यह परियोजना जल, ऊर्जा और सिंचाई के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी और विभिन्न कारणों से यह लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से परियोजना को निर्णायक गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जून को हुई बैठक के बाद परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद केंद्र और सहभागी राज्यों के बीच लगातार समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाया गया और मंगलवार को एमओयू के साथ इसे औपचारिक रूप दिया गया।

किशाऊ परियोजना से करीब 1562 एमसीएम क्षमता का जलाशय बनने तथा 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है। परियोजना का लाभ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा। इससे अपर यमुना बेसिन में जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

धामी ने कहा कि किशाऊ केवल उत्तराखंड की परियोजना नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण है। परियोजना के क्रियान्वयन से यमुना के पुनर्जीवीकरण को भी गति मिलने की संभावना है। हालांकि उत्तराखंड के सामने परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और पुनर्वास संबंधी महत्वपूर्ण दायित्व भी होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित और सम्मानजनक पुनर्वास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए करीब 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके चलते क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना उत्तराखंड के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों से इसके लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में सहयोग का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय और वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार पालन किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और सभी सहभागी राज्य मिलकर परियोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे।

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