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वकील को सुरक्षा मुहैया कराओ वरना पुलिस कमिश्नर पेश होकर दें जवाब

जयपुर, 09 सितंबर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने अदालती आदेश पर वकील को दी गई सुरक्षा को वापस लेने से जुड़े मामले में कहा है कि पूर्व में दिए आदेश के तहत वकील को 15 सितंबर तक सुरक्षा मुहैया कराई जाए। ऐसा नहीं करने पर अदालत ने पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में पेश होकर इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता आरएस राघव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा ने अदालत को बताया कि 20 अगस्त, 2015 के आदेश की अक्षरशः पालना की जाएगी और याचिकाकर्ता को दो निजी सुरक्षा अधिकारी मुहैया कराए जाएंगे। एएजी की ओर से कहा गया कि निगम चुनाव को देखते हुए सरकार को तीन दिन का समय दिया जाए और मामले की सुनवाई 15 सितंबर को तय की जाए। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर को तय करते हुए आदेश की पालना नहीं होने की सूरत में पुलिस कमिश्नर को हाजिर होने के आदेश दिए हैं।

याचिका में अधिवक्ता वीरेन्द्र गोदारा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता साल 2014 से मार्च 2019 तक हाईकोर्ट में लोक अभियोजक के तौर पर कार्यरत था। उस दौरान एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसके विरोध करने पर आरोपी पक्ष ने उन्हें धमकी दी थी। जिस पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से सुरक्षा दिलाने की गुहार की थी। इस पर हाईकोर्ट ने 20 अगस्त, 2015 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने को कहा। इसके बाद याचिकाकर्ता को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए गए। याचिका में कहा गया कि अदालत की ओर से सुरक्षा देने के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद उनकी सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी को वापस बुला लिया गया है, जबकि हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए आदेश में न तो कोई संशोधन किया है और ना ही इसे वापस लिया है। याचिकाकर्ता की ओर से इस संबंध में गत 5 जून को पुलिस प्रशासन को अभ्यावेदन देने पर भी उसकी सुरक्षा बहाल नहीं की गई।

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