चिकित्सा विभाग में कार्यरत रहे प्लेसमेंट कर्मियों को हाईकोर्ट से राहत
जयपुर, 25 जुलाई । राजस्थान उच्च न्यायालय ने चिकित्सा विभाग में प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में कार्यरत रहे चिकित्सा कर्मियों को राहत दी है। अदालत ने कहा है कि यदि विभाग में संबंधित पद खाली हैं और उन पर नए कर्मियों की नियुक्ति हो रही है, तो प्रार्थियों को प्राथमिकता देकर उन पर विचार किया जाए। वहीं अदालत ने प्रार्थियों से कहा है कि वे एक सप्ताह में विभाग के समक्ष अभ्यावेदन दें। जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने यह आदेश आशीष कुमार व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि प्रार्थियों को प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट एवं एएनएम सहित अन्य पदों पर विभिन्न डिस्पेंसरी में नियुक्त किया था। वहीं नई प्लेसमेंट एजेंसी को टेंडर देने पर उन्हें गत सितंबर माह के बाद हटा दिया। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा गया कि वो पिछले सालों से निष्ठापूर्वक अपना काम कर रहे हैं, लेकिन केवल एक नई प्लेसमेंट एजेंसी के आने से उन्हें हटाया गया है। जबकि राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग ने भी बाद में आदेश जारी कर पुराने कार्मिकों को ही प्राथमिकता से लेने के लिए कहा था। इसके बावजूद भी उनकी सेवाएं जारी नहीं रखी गई। प्रार्थियों ने बताया कि विभाग में अनेक पद खाली हैं और उन पर नए कार्मिकों को लगाया जा रहा है। जबकि उन्हें खाली पदों पर नियुक्ति में प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा पूर्व में तय किया जा चुका है कि मौजूदा संविदा कर्मी को नए संविदा कर्मी से नहीं बदला जा सकता।