नेपाल में अब मॉर्चरी में शव रखने पर भी लगेगा 3% टैक्स, सरकार के फैसले पर विवाद
काठमांडू, 21 जुलाई । नेपाल सरकार की नए टैक्स नीति तहत अब मृत्यु के बाद भी टैक्स देना पड़ेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में 3 प्रतिशत अतिरिक्त ‘समता शुल्क’ लागू किए जाने के बाद निजी अस्पतालों के शवगृह (मॉर्चरी) में शव रखने के शुल्क पर भी 3 प्रतिशत टैक्स लागू किया गया है। यह व्यवस्था 20 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है।
इस फैसले से निजी अस्पतालों में इलाज और निजी विद्यालयों में शिक्षा दोनों महंगे हो गए हैं। वित्तमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा लाए गए इस प्रावधान के अनुसार, अस्पतालों की सभी स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स लागू होगा, जिसमें शवगृह में शव रखने का शुल्क भी शामिल है। काठमांडू के बड़े निजी अस्पतालों जैसे नर्भिक, मेडिसिटी, ग्राण्डी तथा कई निजी मेडिकल कॉलेजों में शवगृह की सुविधा उपलब्ध है और इसके लिए शुल्क लिया जाता है। अब इस शुल्क पर भी 3 प्रतिशत कर देना होगा।
निजी अस्पतालों के संगठन के अध्यक्ष डॉ. पदम खड़्का के अनुसार सरकार के निर्णय के बाद अस्पताल द्वारा जारी किए जाने वाले पूरे बिल पर 3 प्रतिशत समता शुल्क देना होगा। उन्होंने कहा कि अब शवगृह में शव रखने, एम्बुलेंस सेवा लेने, डॉक्टर से परामर्श करने, दवाइयां खरीदने और अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी 3 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा।
डॉ. खड़्का ने कहा, “सरकार ने मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। अब अस्पताल का जो भी बिल बनेगा, उसमें 3 प्रतिशत समता शुल्क जुड़कर आएगा, चाहे वह शवगृह का शुल्क ही क्यों न हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने निजी अस्पतालों को टैक्स वसूलने वाला “कलेक्टर” बना दिया है। उनका कहना है, “सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को दंडित किया है। हमें अतिरिक्त टैक्स वसूलने का माध्यम बना दिया गया है।”
डॉ. खड़्का ने बताया कि निजी अस्पतालों ने कई बार सरकार से इस टैक्स को वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन सरकार पीछे नहीं हटी। उन्होंने कहा कि अब अस्पताल इस फैसले का विरोध नहीं करेंगे और सरकार के निर्देशानुसार कर वसूलेंगे।
वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने आर्थिक विधेयक के माध्यम से निजी शिक्षण संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों तथा निजी अस्पतालों की सभी सेवा शुल्कों पर 3 प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा समता शुल्क लगाने की घोषणा की थी। आर्थिक विधेयक में कहा गया है कि निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा मरीजों से लिए जाने वाले सभी प्रकार के सेवा शुल्क पर 3 प्रतिशत स्वास्थ्य समता शुल्क लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस राशि का उपयोग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और आधारभूत संरचना के विकास में किया जाएगा।
विधेयक के अनुसार संबंधित संस्थानों को टैक्स सहित बिल जारी करना होगा और वसूली गई राशि आंतरिक राजस्व कार्यालय में जमा करनी होगी। निर्धारित समय पर कर जमा नहीं करने पर जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार के फैसले के बाद यदि किसी अस्पताल की ओपीडी फीस 1,000 रुपये है तो अब मरीज को 1,030 रुपये चुकाने होंगे। इसी तरह यदि किसी मरीज के इलाज पर 1 लाख रुपये का खर्च आता है तो उसे 3,000 रुपये अतिरिक्त समता शुल्क देना होगा।
इस निर्णय का विरोध करते हुए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रामेश कोइराला ने एक्स पर लिखा कि जब सरकार नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सरकारी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं करा पा रही है और लोग मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करते हैं, तब मृत्यु के बाद शवगृह के शुल्क पर भी कर लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पताल इलाज करने में असमर्थता जताकर किसी मरीज को निजी अस्पताल भेजे और वहां उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके अस्पताल के बिल में शवगृह पर लगने वाला कर भी जोड़ दिया जाएगा, जो अत्यंत अनुचित है।