ग्वालियरः अपनों से उपेक्षित कमला बाई को जन-सुनवाई में मिला सहारा
ग्वालियर, 21 जुलाई । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंगलवार को आयोजित जन-सुनवाई में आमजनों की समस्याओं का निराकरण हुआ, वहीं जरूरतमंदों को सहारा मिला।
कलेक्ट्रेट की जन-सुनवाई में मदद की उम्मीद लेकर पहुँचीं कमला बाई को कलेक्टर रुचिका चौहान ने उनका वाजिब हक दिलाने का भरोसा दिलाया है। कलेक्टर ने अपने कक्ष में आवेदकों को सम्मानपूर्वक एक-एक कर बुलाकर उनकी समस्याएँ सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं कलेक्ट्रेट सभागार में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आमजन की समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई की। जन-सुनवाई में कुल 144 आवेदकों की सुनवाई हुई।
लश्कर क्षेत्र के तारागंज काला सैयद निवासी कमला बाई ने कलेक्टर को बताया कि उनके तीन पुत्र हैं, लेकिन कोई भी उनका भरण-पोषण नहीं करता। उन्होंने बताया कि बेटे-बहुओं की प्रताड़ना के कारण उन्हें दूसरों के घरों में चौका-बर्तन कर जीवनयापन करना पड़ रहा है। उनकी पीड़ा सुनकर कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि एसडीएम न्यायालय, लश्कर में भरण-पोषण एवं वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण से संबंधित प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज कराकर उन्हें उनके वैधानिक अधिकार दिलाए जाएंगे तथा बेटों से भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित कराई जाएगी।
जन-सुनवाई में राजस्व, नगर निगम, विद्युत, पुलिस सहित विभिन्न विभागों से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए सभी एसडीएम एवं तहसीलदारों को आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही नगर निगम क्षेत्र की पेयजल, साफ-सफाई, सड़क एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश नगर निगम अधिकारियों को दिए। जन-सुनवाई में पहुँचे जरूरतमंदों के लिए आवश्यकतानुसार नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था भी कराई गई।
जन-सुनवाई में प्राप्त कुल 144 आवेदनों में से 84 आवेदन पंजीबद्ध किए गए, जबकि शेष 60 आवेदन आवश्यक टीप के साथ संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में निराकरण के लिए प्रेषित किए गए।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जन-सुनवाई में अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, अपर जिला दंडाधिकारी सी.बी. प्रसाद, अपर कलेक्टर अनिल बनवारिया सहित जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएँ सुनकर उनके निराकरण की रूपरेखा तय की।