सरकारी अस्पतालों में दो मौतों पर विधायक ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
पूर्वी सिंहभूम, 01 जून । शहर के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों—सदर अस्पताल और एमजीएम अस्पताल—में उपचार के दौरान हुई दो मरीजों की मौतों को लेकर सोमवार को जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने दोनों मामलों को संभावित चिकित्सीय लापरवाही और स्वास्थ्यकर्मियों की संवेदनहीनता से जुड़ा बताते हुए राज्य सरकार से तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
विधायक ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दोनों घटनाओं की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए विशेष समिति गठित करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि लगातार दो दिनों के भीतर हुई इन मौतों ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
पत्र में उन्होंने जेम्को स्थित आजाद बस्ती, शिव मंदिर लाइन निवासी भुवनेश्वर कुमार के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि परिजनों के अनुसार कमर में असहनीय दर्द की शिकायत के बाद उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि अस्पताल में केवल एक इंजेक्शन देने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया, जबकि उनकी हालत गंभीर थी। घर लौटने के कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई।
इसी तरह भुइयांडीह कान्हू भट्ठा निवासी पत्रकार आशिष कुमार के बड़े भाई श्रवण कुमार को पैर में तेज दर्द की शिकायत के कारण एमजीएम अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकीय जांच और उपचार में देरी हुई, जिसके कारण अस्पताल परिसर में ही उनकी मौत हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्णिमा साहू ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से फोन पर बातचीत कर दोषी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो संबंधित कर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने तक की कार्रवाई होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
विधायक ने दोनों मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य मंत्री, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है। साथ ही जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद लोगों की अंतिम उम्मीद होते हैं, इसलिए मरीजों की जान से जुड़ी किसी भी लापरवाही को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।