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बलरामपुर : जैविक खेती और जल संरक्षण अपनाने पर जोर, किसानों ने लिया संकल्प

बलरामपुर, 16 जून । आज मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कृषि विज्ञान केंद्र बलरामपुर में प्राकृतिक एवं जैविक खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा रहीं। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जैविक खेती आवश्यक है और इससे किसानों की आय में वृद्धि तथा लागत में कमी संभव है।

उन्होंने 5 प्रतिशत संरचना के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने की बात कही और किसानों से जल संरक्षण अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए प्रत्येक किसान को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि बलरामपुर का चांगरो चावल एवं जिले की प्राकृतिक कृषि उपज अपनी गुणवत्ता के कारण विशेष पहचान रखती है। उन्होंने किसानों से नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के संतुलित उपयोग के साथ जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी नई दिशा मिलेगी।

जिला सहकारी बैंक के संभागीय अध्यक्ष रामकिशुन सिंह ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही प्रदेश के विकास का आधार है। उन्होंने जैविक खेती और जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, रेडक्रॉस सोसायटी अध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनी निकुंज, जनपद अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा, नगर पालिका अध्यक्ष लोधीराम एक्का, उपाध्यक्ष दिलीप सोनी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस दौरान अतिथियों ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यशाला में किसानों ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों ने जैविक खेती की तकनीकों, लाभों एवं जल संरक्षण उपायों की जानकारी दी। किसानों ने कहा कि वे अब रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

कार्यक्रम में शाला प्रवेश उत्सव भी उत्साहपूर्वक मनाया गया, जिसमें नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया गया तथा उन्हें बैग, पुस्तकें एवं गणवेश वितरित किए गए। बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया गया।

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