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हमारी संस्कृति विविधता में एकता का दर्शन कराती है : रघुवीरसिंह सिसौदिया

मन्दसौर, 17 मई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) रव‍िवार को मध्‍य प्रदेश के मन्दसौर ज‍िले में विधिवत प्रारंभ हुआ। इस वर्ग में 28 जिलों से चयनित 302 शिक्षार्थी उपस्थित हैं। 15 दिनों तक चलने वाले इस संघ शिक्षा वर्ग में शिक्षार्थी संघ की कार्यपद्धति सह-जीवन, अनुशासन आदि का प्रशिक्षण लेंगे। प्रात: 4.10 बजे जागरण से लेकर रात्रि 10.15 बजे दीप निमिलन तक विभिन्न शारीरिक एवं बौद्धिक सत्रों द्वारा शिक्षार्थियों का प्रशिक्षण होगा।

सत्र का प्रारंभ भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वर्ग के माननीय सर्वाधिकारी जैनेन्द्र जैन व वर्ग पालक मालवा प्रांत के सह प्रांत प्रचारक श्री केतन सोजीतरा , डॉ. सुमंत कुशवाह वर्ग कार्यवाह भी उपस्थित रहे।

उद्घाटन सत्र में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मालवा प्रांत के सह कार्यवाह रघुवीरसिंह सिसौदिया ने वर्ग का महत्व बताते हुए कहा मां भारती की सेवा का अवसर हमारे जीवन में आया है। सामूहिक जीवन जीने की कला सीखने का यह अवसर है। आनंद एवं उत्साह का वातावरण हमें निर्माण करना है। सुख सुविधाओं को छोड़कर इस वर्ग में कार्यकर्ता बनने हेतु प्रशिक्षण लेने के लियें हम इस वर्ग में आये हैं।

सिसौदिया ने आगे कहा कि हिन्दू संस्कृति क्या है ? हमारी भारतीय संस्कृति विविधता में एकता का दर्शन कराती है, कई आक्रमणों को झेलकर भी हम आज जीवित है। अनेकता में एकता का दर्शन भारतीय संस्कृति का मूल्य है। हमारी संस्कृति नीर्जिव वस्तुओं को भी देवता के समान मानती है। मिट्टी, नदी, पहाड़ इत्यादि पूजे जाते है। हम जब कोई नवीन वाहन या यंत्र, उपकरण भी खरीदते है तो भी उसका पूजन करते है। चारधाम यात्राऐं एवं तीर्थ यात्रा अपनत्व का भाव जागरण करने हेतु की जाती है। पूरे विश्व से सतायें एवं भगायें गये लोगों को भारत ने हमेशा संरक्षण दिया है और वह हमारे देश में सुख-चैन से रह भी रहे है। विश्व का कल्याण हो यह हम कहते ही नहीं अपितु आचरण से करके दिखाते हैं। सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव हमेशा हमारे मन में रहता है। इसीलिए कोराना काल के तहत वैक्सीन विदेशों में भी हमने पहुंचाई। आज विश्व में कई देश अपने स्वार्थ सिद्धी के लिए लड़ाई लड़ रहे है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष हमारे चार आधार है। हमारे चार आश्रम जिसके आधार पर जीवन चलायमान होता है। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास 25-25 वर्ष का एक-एक आश्रम होता है। शरीर, मन, बुद्धि एवं आत्मा हमारे साधन है। हमारी रीति शोषण की नहीं दोहन की है। केवल पूजा भक्ति तक हमारी संस्कृति सीमित नहीं है यह जीवन जीने की कला है हमें इसका संरक्षण करना है।

वर्ग में उपस्थित शिक्षार्थियों से कहा संघ के स्वयंसेवक का होना ही अपने आप में भाग्यशाली पल है। इस वर्ग में कुछ सीखें, सीखने के बाद आप देश, परिवार, समाज, नगर, ग्राम के लिए कुछ कर पाए तभी यह वर्ग सार्थक सिद्ध हो पाएगा, क्योकि संघ का शिक्षा वर्ग कार्यकर्ताओ के निर्माण की साधना है। इस वर्ग का समापन प्रकट कार्यक्रम के साथ 31 मई को सायं 6 बजे सरस्वती विहार प्रांगण संजीत रोड़, मन्दसौर में संपन्न होगा।

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