व्हाट्सएप ने साइबर अपराधों में शामिल पाए गए 9400 अकाउंट्स बैन किए
नई दिल्ली, 28 अप्रैल । डिजिटल अरेस्ट पर बड़ी कार्रवाई करते हुए व्हाट्सएप ने जनवरी से लेकर अब तक ऐसे 9400 अकाउंट्स को बैन किया है, जो साइबर अपराधों में शामिल पाए गए। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। इस कार्रवाई में टेलीकॉम रेगुलेटर, सर्विस प्रदाता, रिजर्व बैंक, तकनीकी कंपनियां और सीबीआई समेत कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी की ओर से इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर ने उच्चतम न्यायालय में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों पर रोक लगाने के लए कई स्तरों पर कदम उठाये जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 12 हफ्तों में व्हाट्सएप ने डिजिटल अरेस्ट के जुड़े 9400 अकाउंट्स को बैन कर दिया। कोर्ट ने रिजर्व बैंक, दूरसंचार विभाग और दूसरी एजेंसियों को मिलकर एक ऐसा ढांचा बनाने का निर्देश दिया जो डिजिटल अरेस्ट के मामलों के पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था तैयार की जा सके।
उच्चतम न्यायालय ने 20 अप्रैल को डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह चौंकाने वाली बात है कि सबसे अधिक शिक्षित लोग भी इस तरह के डिजिटल फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने बताया था कि इस मुद्दे पर विभागों के बीच आंतरिक बैठक हो चुकी है और एक अंतिम बैठक भी जल्द होगी। 17 अक्टूबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया था।
उच्चतम न्यायालय ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही करने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था। बुजुर्ग दंपति ने तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखकर इस जालसाजी के बारे में बताया था। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला एकमात्र मामला नहीं है। इसे लेकर मीडिया में कई खबरें आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक दस्तावेज की जालसाजी, निर्दोष लोगों और खासकर वरिष्ठ नागरिकों से जबरन वसूली और लूट से जुड़े आपराधिक कृत्य का खुलासा करने के लिए केंद्र और राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की जरुरत है।
बुजुर्ग दंपति ने पत्र में कहा था कि 3 से 16 सितंबर के बीच दंपति की गिरफ्तारी और निगरानी की बात करने वाला मुहर लगा एक जाली अदालती आदेश पेश किया गया। इसके बाद कई बैंक लेनदेन के जरिये एक करोड़ रुपये के अधिक की धोखाधड़ी की गई। बुजुर्ग महिला के मुताबिक कुछ लोगों ने ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिये कोर्ट के आदेश दिखाए।