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राजस्‍थान बजट: कृषि क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 1.19 लाख करोड़ का प्रावधान

जयपुर, 12 फ़रवरी । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की किसान हितैषी नीतियों के तहत बजट वर्ष 2026-27 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए रिकॉर्ड एक लाख 19 हजार 408 करोड़ 11 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि गत वर्ष की तुलना में 7.59 प्रतिशत अधिक है। सरकार का दावा है कि इन प्रावधानों से किसानों की आय, उत्पादकता और कृषि अवसंरचना को नई मजबूती मिलेगी तथा राजस्थान को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बजट में ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण योजना के तहत 35 लाख से अधिक किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर 800 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान दिया जाएगा। दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन-फार्मिंग सेक्टर के लिए 590 करोड़ रुपये का ऋण 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे करीब 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे।

सिंचाई और खेतों की आधारभूत सुविधाओं के लिए 585 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्रस्तावित है। इसके तहत 8 हजार डिग्गियां, 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइपलाइन तथा अगले दो वर्षों में 36 हजार फार्म पॉण्ड बनाए जाएंगे, जिससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।

50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। सामुदायिक तारबंदी में न्यूनतम कृषक संख्या 10 से घटाकर 7 कर दी गई है।

इसके अलावा 50 हजार किसानों को कृषि यंत्रों पर 160 करोड़ रुपये का अनुदान तथा 500 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

राज्य में उन्नत बीजों को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख किसानों को मूंग, 1-1 लाख किसानों को मोठ और ज्वार-बाजरा-बरसीम के मिनीकिट वितरित किए जाएंगे। 2.50 लाख किसानों को दलहनी और तिलहनी फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। पांच हजार से अधिक आबादी वाली 3,496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित की जाएंगी। प्रथम चरण में 2,098 ग्राम पंचायतों में लगभग 270 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

किसानों को जलवायु जोखिम से बचाने के लिए डिजिटल कृषि मिशन के तहत ‘राज कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली’ विकसित की जाएगी। एआई, एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य निगरानी और जोखिम प्रबंधन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

प्रदेश के विशिष्ट कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ‘मिशन राज गिफ्ट’ भी प्रारंभ किया जाएगा।

राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड को 1 हजार करोड़ से बढ़ाकर 2 हजार करोड़ रुपये किया गया है। ‘सरस’ ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए एनसीआर, यूपी और एमपी में आउटलेट्स खोले जाएंगे।

मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत 5 लाख पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2047 तक दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 200 लाख लीटर प्रतिदिन और एक लाख बिक्री केंद्रों का लक्ष्य रखा गया है।

आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का जीएसवीए में योगदान 25.74 प्रतिशत है, जबकि पशुधन क्षेत्र का जीएसवीए 2.17 लाख करोड़ रुपये (49.35 प्रतिशत) है। खरीफ दलहन उत्पादन 20.50 लाख मैट्रिक टन और रबी दलहन 26.61 लाख मैट्रिक टन होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना के तहत 1.12 लाख क्विंटल बीज वितरित किए गए। नई किस्मों के 31.50 लाख बीज मिनीकिट निःशुल्क दिए गए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 6,206 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में 10.63 लाख पशु और 5.54 लाख परिवार लाभान्वित हुए।

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,070 कृषि ड्रोन खरीदने पर 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया गया।

सरकार का कहना है कि इन व्यापक प्रावधानों से कृषि, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी तथा विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार होगा।

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