पीएम आवास से गरिमा तक की प्रेरक यात्रा, मनराखन को मिला सम्मानजनक आवास
लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने उनके जीवन में उम्मीद की किरण जगाई। वर्ष 2024-25 में उन्हें 1.20 लाख रूपये की स्वीकृत राशि मिली, और इसी क्षण से उनके सपनों के घर का निर्माण शुरू हुआ। निर्माण के दौरान उन्हें महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से 90 दिवस की मजदूरी का भुगतान किया गया। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत जलवाहित शौचालय और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से एलपीजी गैस कनेक्शन मिला, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता और बेहतर हो गई। शासन की योजनाओं का यह समन्वय उनके लिए सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बन गया।
आज वे अपने नव-निर्मित पक्के घर में सुरक्षित, स्वाभिमानपूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन जी रहे हैं। उनकी खुशी शब्दों में बयां नहीं होती। वे भावनात्मक होकर बताते हैं गरीबी के कारण घर बनाना मेरे लिए सिर्फ़ एक सपना था। प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरे उस सपने को घर की नींव में बदल दिया। आज मैं और मेरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। मैं शासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। श्री मनराखन की कहानी यह सिद्ध करती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सिर्फ़ घर नहीं देती – बल्कि सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य देती है। उनकी यह सफलता ग्रामीण भारत में चल रहे आवासीय परिवर्तन का सशक्त प्रमाण है और यह दिखाती है कि शासन की योजनाएँ सही लाभार्थियों तक पहुँचकर उनके जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।