दीपावली को लेकर सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्रों में पत्थर से बने पात्र में बनता है परम्परिक पहाड़ी व्यंजन असकली
पंजाहल के शिवचरण ने बताया कि असकली बनाने को महिलाएं सुबह 4 बजे उठ जाती हैं और गहने इत्यादि डालकर असकली बनाई जाती है। इसे बहुत शुभ माना जाता है और इसे परिवारजनों में भी बांटा जाता है। सभी घरों में असकली बनाने की परम्परा आज भी कायम है। सभी घरों में असकली बनाने की परम्परा आज भी कायम है।
उल्लेखनीय है कि दीवाली पर असकली बनाने की परम्परा ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कायम है लेकिन धीरे धीरे इस में कमी आने लगी है इस तरह की स्वस्थ परम्परा को सरंक्षण देने की जरूरत है।