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दिल्ली हाईकोर्ट में आज सेलेबी की अपील पर सुनवाई, संशय में सुरक्षा मंजूरी रद्द!

सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सेलेबी दिल्ली कार्गो टर्मिनल मैनेजमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई जस्टिस सचिन दत्ता की अध्यक्षता में होने वाली है। यह मामला 19 मई को सुनवाई के लिए रखा गया था, लेकिन समय की कमी के कारण इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया। पिछले सुनवाई में सेलेबी के वकील, एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने बताया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उनकी कंपनी का सिक्योरिटी क्लियरेंस रद्द कर दिया गया है। यह रद्दीकरण तुर्किये के शेयरहोल्डर्स होने की धारणा के चलते किया गया। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और कंपनी के नियंत्रण तथा निर्देशों का स्रोत अधिक महत्व रखता है। जस्टिस दत्ता ने इस पर कहा कि नियमों के अनुसार, सावधानी बरतना हमेशा बेहतर होता है।

भारत सरकार ने सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सिक्योरिटी क्लियरेंस को 15 मई को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया। यह निर्णय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के आदेशानुसार राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया। इसके परिणामस्वरूप, यह कंपनी भारतीय एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवा प्रदान नहीं कर पाएगी। सेलेबी कंपनी, जो तुर्किये की एक प्रमुख ग्रुप का हिस्सा है, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, और अन्य प्रमुख भारतीय शहरों में अपनी सेवाएं प्रदान करती थी।

सेलेबी ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए कहा है कि निर्णय का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और इसे बिना पूर्व सूचनाओं के लागू किया गया। कंपनी का दावा है कि इससे 3,791 नौकरियों पर भी प्रभाव पड़ेगा और निवेशकों का विश्वास भी डगमगा सकता है। सेलेबी ने बताया कि वह भारत में पिछले 15 वर्षों से सक्रिय है, और ग्राउंड हैंडलिंग के क्षेत्र में उनकी प्रमुखता साबित हुई है। कंपनी ने 220 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश भारत में किया है और उन्होंने 10,000 से अधिक भारतीयों को रोजगार दिया है।

इस बीच, तुर्किये कंपनियों के कुछ प्रोजेक्ट्स भारत के पांच राज्यों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गुजरात में जारी हैं, जिसमें आईटी और मेट्रो रेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने इन तुर्किये कंपनियों के भारतीय प्रोजेक्ट्स की गतिविधियों की समीक्षा करने का फैसला किया है। अधिकारी बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर, यदि कोई खतरा महसूस होता है तो इन कंपनियों को प्रोजेक्ट्स से हटाने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

इससे इतर, तुर्किये के खिलाफ भारत में एक बायकॉट अभियान भी शुरू हो चुका है। विशेष रूप से पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण, तुर्किये से आयात होने वाले उत्पादों का बायकॉट कड़ा हो गया है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने तुर्किये और अजरबैजान के साथ व्यापार करने से मना कर दिया है। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि जो देश भारत के खिलाफ हैं, उनके साथ किसी प्रकार का व्यापार नहीं किया जाएगा। इस बायकॉट से तुर्किये की उत्पादों पर असर पड़ना तय है।

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