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मुख्यमंत्री डॉ. यादव विजयादशमी पर्व पर मंगलवार को इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन

भोपाल, 19 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार, 20 अक्टूबर को इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर में और वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल बैतूल में शस्त्र पूजन आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रीगण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को जारी अपने संदेश में कहा है कि शस्त्र-पूजन भारतीय सेना के पराक्रम, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भगवान श्रीराम के देश में शक्ति के प्रतिमान गढ़े जा रहे हैं। विजयादशमी पर प्रदेशभर में आयोजित शस्त्र-पूजन कार्यक्रमों के आयोजन का उद्देश्य राष्ट्र की सुरक्षा, सैन्य सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता के प्रति सम्मान तथा नागरिकों में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करना है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व सत्य की असत्य पर विजय और शक्ति के अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के संकल्प की सार्थकता का प्रतीक है। भारतीय सनातन संस्कृति में शस्त्र-पूजन की परंपरा शक्ति के विवेकपूर्ण उपयोग, निर्बलों की रक्षा, धर्म एवं न्याय की स्थापना और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति कर्त्तव्यबोध का संदेश देती है। इसी सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सम्मान की भावना को व्यापक रूप से अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने प्रदेश में विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।

भारतीय परंपरा में शस्त्र-पूजन का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह सामरिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विजयादशमी पर शस्त्रों का पूजन कर शक्ति के सदुपयोग, आत्मरक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संकल्प लिया जाता है। यह परंपरा सिखाती है कि शक्ति का उद्देश्य आक्रमण या अत्याचार नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और निर्बलों की रक्षा करना है।

मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पूर्व मां शक्ति की उपासना की और अपने अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया था। महाभारत की परंपरा में भी पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान सुरक्षित रखे गए अपने अस्त्र-शस्त्र विजयादशमी पर पुनः प्राप्त कर उनका पूजन करने का उल्लेख मिलता है। भारतीय इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज सहित अनेक शूरवीर योद्धाओं द्वारा विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन और विजय-प्रस्थान की परंपरा रही है।

सनातन संस्कृति में शास्त्र और शस्त्र दोनों का समान महत्व है। शास्त्र ज्ञान, संस्कार और जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शन करते हैं, जबकि शस्त्र अन्याय के प्रतिकार तथा समाज और राष्ट्र की रक्षा के साधन हैं। ‘ धर्मो रक्षति रक्षितः’ का भाव भी यही प्रेरणा देता है कि धर्म, न्याय और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए सामर्थ्य के साथ कर्तव्य का निर्वहन आवश्यक है।

शस्त्र-पूजन की परंपरा भारतीय सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के साहस, अनुशासन तथा राष्ट्ररक्षा के संकल्प से भी जुड़ी है। सीमा पर तैनात सैनिकों का त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण देशवासियों की सुरक्षा का आधार है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन के माध्यम से राष्ट्र की संप्रभुता, स्वाभिमान और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश शक्ति संपन्न और सामर्थ्यवान बन रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों की कार्रवाई ने सैन्य कौशल, साहस और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति संकल्प को प्रदर्शित किया। शस्त्र-पूजन इस भावना को भी पुष्ट करता है कि शांति और सद्भाव की रक्षा के लिए राष्ट्र का सजग, अनुशासित और सामर्थ्यवान होना आवश्यक है।

भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना का उद्देश्य लोकमंगल है। मां दुर्गा की उपासना आत्मबल, साहस, नारी शक्ति के सम्मान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देती है। शस्त्र-पूजन का मूल संदेश है कि शक्ति मर्यादा और अनुशासन से संचालित हो तथा उसका उपयोग मानवता के कल्याण के लिए किया जाए।

विजयादशमी आत्मचिंतन और आत्मसुधार का अवसर भी है। रावण-दहन के साथ अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्तव्य के प्रति उदासीनता जैसी बुराइयों को त्यागने का संकल्प आवश्यक है। सामाजिक एकता, अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण ही सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला हैं।

जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि राज्य शासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले शस्त्र-पूजन कार्यक्रमों के लिए मंत्रीगण को मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है। जिन जिलों में मंत्रीगण कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे, वहां संबंधित जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शस्त्र-पूजन करेंगे। कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

राज्य शासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे विजयादशमी पर अपने-अपने घरों में परंपरानुसार शस्त्र-पूजन करें। कार्यक्रमों की समस्त व्यवस्थाएं संबंधित जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सुनिश्चित की जाएंगी।

इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मंदसौर में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। खंडवा में मंत्री कुंवर विजय शाह, धार में कैलाश विजयवर्गीय, नरसिंहपुर में प्रहलाद सिंह पटेल, जबलपुर में राकेश सिंह, सीहोर में करण सिंह वर्मा, नर्मदापुरम में उदय प्रताप सिंह, मंडला में संपतिया उईके, देवास में तुलसीराम सिलावट, मुरैना में एदल सिंह कंषाना, झाबुआ में निर्मला भूरिया, सागर में गोविंद सिंह राजपूत, भोपाल में विश्वास कैलाश सारंग, दतिया में नारायण सिंह कुशवाह, अलीराजपुर में नागर सिंह चौहान, भिंड में राकेश शुक्ला और शाजापुर में इंदर सिंह परमार मुख्य अतिथि होंगे। इसी तरह विदिशा में राज्य मंत्री कृष्णा गौर, दमोह में धर्मेन्द्र सिंह लोधी, अनूपपुर में दिलीप जायसवाल, राजगढ़ में गौतम टेटवाल, कटनी में लखन पटेल, आगर मालवा में नारायण सिंह पवार, रायसेन में नरेन्द्र शिवाजी पटेल, सतना में प्रतिमा बागरी, छतरपुर में दिलीप अहिरवार और सिंगरौली में राधा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। बैतूल में वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल मुख्य अतिथि होंगे।

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