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Himachal Pradesh

आउटसोर्स कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी, नीति बनाने की घोषणा पर उठाए सवाल

शिमला, 11 अक्टूबर । हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन की जिला कमेटी की बैठक में प्रदेश सरकार की नीति बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए गए। यूनियन ने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन इन्हें लागू करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।

यूनियन ने सरकार से समयबद्ध नीति बनाकर लागू करने, कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित करने, समय पर वेतन देने और वर्षों के अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि की व्यवस्था करने की मांग की है।

शिमला में रविवार को हुई बैठक में सरकारी विभागों, निगमों और संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कई कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के तहत वेतन से कटौती होने के बावजूद कई मामलों में संबंधित राशि कर्मचारियों के खातों में नियमानुसार जमा नहीं की जा रही है। कर्मचारियों को वेतन पर्ची, पहचान पत्र, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ प्राप्त करने में भी परेशानी हो रही है।

यूनियन ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों से नियमित कर्मचारियों के समान काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें नौकरी की सुरक्षा, उचित वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। ठेकेदार बदलने पर कर्मचारियों की नौकरी पर संकट पैदा हो जाता है। कई कर्मचारी एक ही विभाग या संस्थान में वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उनके रोजगार का भविष्य सुरक्षित नहीं है। यूनियन ने मांग की कि ठेकेदार बदलने की स्थिति में कर्मचारियों को बिना उचित कारण नौकरी से न हटाया जाए और उन्हें समय पर वेतन सहित सभी वैधानिक लाभ दिए जाएं।

बैठक में कर्मचारियों के अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि का मुद्दा भी उठाया गया। यूनियन ने कहा कि कई कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी न्यूनतम वेतन ही मिल रहा है। लंबे अनुभव के बावजूद उनके वेतन में वरिष्ठता के आधार पर वृद्धि नहीं की जाती। यूनियन ने सरकार से वरिष्ठता के आधार पर वेतन वृद्धि की व्यवस्था करने और इस समस्या को दूर करने की मांग की।

वक्ताओं ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने की सरकारी घोषणाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनावी वर्ष के अंतिम चरण में नीति बनाने की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। यूनियन ने कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। सरकार को नीति बनाने और उसे लागू करने के लिए समयसीमा तय करनी चाहिए। मांगें पूरी नहीं होने पर कर्मचारियों को लामबंद कर आंदोलन किया जाएगा।

बैठक में केंद्र सरकार की चार श्रम संहिताओं का भी विरोध किया गया। यूनियन के अनुसार इनके प्रावधान मजदूरों के अधिकारों, नौकरी की सुरक्षा और सामूहिक संघर्ष की ताकत को कमजोर करते हैं। यूनियन ने बताया कि सीटू और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 1 और 2 दिसंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित 48 घंटे के महापड़ाव में सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी भाग लेंगे।

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