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वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ अमर्यादित भाषा पर जिला आयोग को लगाई फटकार

जोधपुर, 10 सितम्बर । राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ पत्रावली में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किए जाने को गंभीरता से लेते हुए जिला उपभोक्ता आयोग को भविष्य में ऐसी भाषा के प्रयोग को लेकर सावधान रहने की हिदायत दी है। आयोग ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग आपत्तिजनक, अनुचित तथा उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है।

आयोग अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा, न्यायिक सदस्य उर्मिला वर्मा एवं सदस्य लियाकत अली की पीठ ने परिवादी की अपील स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को दावा राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। आयोग ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि अपीलार्थी को 1 लाख 7 हजार 649 रुपए की दावा राशि पर 10 मई 2023 से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति तथा 5 हजार रुपए वाद व्यय का भुगतान 45 दिन में करे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत ब्याज देय होगा। अपील में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल सिंघवी की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने पक्ष रखा।

उन्होंने बताया कि जिला आयोग के समक्ष बीमा कंपनी की ओर से पेश हलफनामे में परिवादी के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया था। इस पर जिला आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही परिवाद को भी पूर्व में खारिज कर दिया गया था। मामले को अपील में चुनौती दिए जाने पर राज्य आयोग ने जिला आयोग का आदेश निरस्त कर प्रकरण को पुन: सुनवाई के लिए वापस भेजा था। अधिवक्ता भंडारी ने बहस के दौरान कहा कि स्वास्थ्य बीमा विनियम, 2016 में प्रावधान होने के बावजूद जिला आयोग ने दावा राशि पर ब्याज नहीं दिलाया।

उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ पत्रावली में अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल को शर्मनाक बताते हुए कहा कि जिला आयोग ने इस पर संज्ञान नहीं लिया और दावा राशि पर ब्याज दिलाने का प्रावधान भी लागू नहीं किया। राज्य आयोग ने अपील मंजूर करते हुए कहा कि पत्रावली में वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल आपत्तिजनक, अनुचित और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है। आयोग ने जिला आयोग को भविष्य में ऐसी स्थिति का विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी। साथ ही स्वास्थ्य बीमा विनियमों में ब्याज के प्रावधान के बावजूद ब्याज नहीं दिलाने को भी गलत ठहराते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित राशि ब्याज, क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय सहित अदा करने के आदेश दिए।

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