अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की सप्लाई का खुलासा
अजमेर, 20 अगस्त। अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और संदिग्ध आर्थिक लेन-देन का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन की जांच में एक मोबाइल नंबर पर जेल के एसटीडी से 1283 बार कॉल किए जाने और उससे जुड़े बैंक खातों में करीब 50 लाख रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
मामले में जेल प्रशासन की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने 19 अगस्त 2026 को करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच सिविल लाइंस थाने के एएसआई लक्ष्मण को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित पहले अजमेर सेंट्रल जेल में बंद थे और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।
बंदी की शिकायत से शुरू हुई जांच : जानकारी के अनुसार हत्या के दो मामलों में जेल में बंद भीकाराम ने 22 जुलाई 2025 को पीआईसीएस (जेल एसटीडी) के माध्यम से महानिदेशालय कारागार को शिकायत भेजी थी। उसने आरोप लगाया था कि विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल ने उसके साथ मारपीट की तथा नशे की एक गोली करीब 500 रुपये में बेचने और रकम एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन ट्रांसफर करवाने की बात कही। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया। शिकायत मिलने के बाद जेल प्रशासन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की।
एक नंबर पर 1283 बार कॉल….
जांच में सामने आया कि अजमेर केंद्रीय कारागृह से एक मोबाइल नंबर पर कुल 1283 बार कॉल किए गए। कई दिनों में इस नंबर पर 3 से लेकर 29 बार तक कॉल किए जाने की बात सामने आई। जांच में यह नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम सामने आया। उसके बैंक खाते के स्टेटमेंट की जांच में 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच करीब 49 लाख
तीन बैंक खातों से जुड़ा मोबाइल नंबर..
जांच रिपोर्ट के अनुसार जयराम रावत का मोबाइल नंबर तीन बैंक खातों से जुड़ा था। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा की अजमेर शाखा का खाता, एसबीआई की श्रीनगर शाखा में शिवराज सिंह की पत्नी के नाम का खाता और एक अन्य एसबीआई खाता शामिल है। इन खातों में करीब 50 लाख रुपये के लेन-देन की जानकारी जांच में सामने आई है। जेल प्रशासन की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बंदियों के एसटीडी अकाउंट से होने वाले सामान्य खर्च की तुलना में संबंधित खाते में हुआ लेन-देन काफी अधिक है। इसी आधार पर पूरे मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जेलकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में…
जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि जेल के एसटीडी से एक ही मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल किए जाने के पीछे किसी जेलकर्मी की मिलीभगत हो सकती है। यह नंबर जेल के एसटीडी से किसकी भूमिका से जुड़ा और संबंधित व्यक्ति को इससे कोई लाभ मिला या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। पुलिस अब दर्ज एफआईआर के आधार पर नशे की गोलियों की कथित सप्लाई, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और जेलकर्मियों की संभावित भूमिका समेत पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार पुलिस को 79 हजार 967 रुपये क्रेडिट होने की जानकारी मिली। वहीं खाते में क्लोजिंग बैलेंस करीब 13,358 रुपये बताया गया। जांच में जयराम रावत के चचेरे भाई शिवराज सिंह का नाम भी सामने आया। पूछताछ में शिवराज ने बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद कैदियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था और इसके बाद बंदियों के परिजन ऑनलाइन रकम भेजते थे।